पंजाब चुनाव से ठीक पहले चड्ढा-मोदी मुलाकात ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

पीएम मोदी और राघव चड्ढा की मुलाकात, पंजाब चुनाव 2027

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पंजाब की राजनीति में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब भाजपा सांसद राघव चड्ढा शनिवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे। इस भेंट की तस्वीरें साझा करते हुए चड्ढा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह उनके लिए एक खास और यादगार सुबह रही। गौरतलब है कि इससे ठीक पहले शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी प्रधानमंत्री से मुलाकात कर चुके थे, जिस वजह से सियासी गलियारों में इन दोनों मुलाकातों को जोड़कर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी को अलविदा कहते हुए छह अन्य सांसदों के साथ भाजपा का रुख किया था। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री से हुई बातचीत के विषय पर कुछ खास साझा नहीं किया, लेकिन इसे एक ज्ञानवर्धक चर्चा बताया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करना उनके लिए सौभाग्य की बात है और यह एक विस्तृत बातचीत रही, जिसके लिए उन्होंने पीएम का उनके समय और मार्गदर्शन हेतु आभार व्यक्त किया।

राजनीतिक समीकरणों में क्यों अहम है यह मुलाकात

आगामी वर्ष पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। राज्यसभा सदस्य के रूप में पंजाब का प्रतिनिधित्व करने वाले चड्ढा का पैतृक जुड़ाव जालंधर से रहा है, जिस कारण चुनावी रणनीति में उन्हें अहम भूमिका मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं।

अप्रैल में हुए घटनाक्रम में चड्ढा ने छह अन्य सांसदों समेत आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ते हुए भाजपा ज्वाइन कर ली थी। कभी पंजाब में AAP का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले चड्ढा का यह कदम पार्टी के लिए बड़ा नुकसान साबित हुआ था, खासतौर पर इसलिए क्योंकि देशभर में पंजाब ही एकमात्र राज्य है जहां आज भी AAP की सरकार कायम है।

भाजपा में शामिल होने के बाद से चड्ढा को संगठन में एक बड़ी जिम्मेदारी मिलने की अटकलें लगातार तेज हो रही हैं। पंजाब की चुनावी राजनीति की बेहतरीन समझ और शहरी मतदाताओं में उनकी लोकप्रियता भाजपा को अमृतसर, लुधियाना और जालंधर सरीखे शहरी क्षेत्रों में मजबूती देने का काम कर सकती है। अकाली दल से गठबंधन खत्म होने के बाद व्यापारी और मध्यम वर्गीय मतदाताओं के बीच भाजपा की पकड़ कुछ कमजोर पड़ी थी, ऐसे में चड्ढा की एंट्री पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

उधर, चड्ढा से मुलाकात से एक दिन पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल से भी भेंट की थी। इन दोनों घटनाक्रमों को जोड़कर देखते हुए सियासी विश्लेषक मान रहे हैं कि भाजपा अपने पुराने सहयोगी दलों के साथ रिश्तों को फिर से नई दिशा देने पर विचार कर सकती है। आम आदमी पार्टी के उभार के बाद कमजोर हुआ अकाली दल — जो अब केवल तीन विधायकों और एक सांसद तक सिमट गया है — भी भाजपा से नजदीकी बढ़ाने का इच्छुक नजर आ रहा है।

पंजाब में तेजी से करवट ले रहे सियासी हालात के बीच अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या चड्ढा को मिलने वाली संभावित भूमिका भाजपा की चुनावी संभावनाओं को नई मजबूती दे पाएगी। इसका जवाब आने वाले समय में ही सामने आएगा।

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