गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के एक लॉ स्टूडेंट को दिल्ली के जांटर मांटर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने की वजह से 5 लाख रुपये के मुचलके का नोटिस थमा दिया गया, जिसके बाद पूरा मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत इस नोटिस को लेकर सख्त नजर आए और उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्रशासन से जवाब तलब कर लिया।
आखिर मामला क्या है?
GBU के सेकंड ईयर लॉ स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी पर आरोप था कि उन्होंने “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) द्वारा आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इसके बाद ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने 4 सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी करते हुए अक्षत से पूछा कि उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और इतनी ही रकम की दो जमानतें क्यों न मांगी जाएं। ये कार्रवाई असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस की कोर्ट के जरिए धारा 126 और 135 के तहत शुरू हुई थी।
छात्र का पक्ष
अक्षत त्रिपाठी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन में पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था। साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि वो उस दौरान यूनिवर्सिटी की क्लासेज में मौजूद नहीं थे, क्योंकि GBU कैंपस पिछले करीब तीन महीने से बंद पड़ा था।
CJI सूर्य कांत की सख्त प्रतिक्रिया
मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस नोटिस पर तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने वकील से कहा कि तथ्य रिकॉर्ड पर रखे जाएं और साफ कहा, “हम स्पष्टीकरण मांगेंगे, उन्हें बताना होगा।” कोर्ट का इशारा सीधे गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम की ओर था।
1 सितंबर के सुप्रीम कोर्ट आदेश से जुड़ा है मामला
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को केंद्र और कई राज्यों की उन अर्जियों पर सुनवाई करते हुए एक अहम आदेश दिया था, जिसमें CJP प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को बंद करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि CJP प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले सभी प्रदर्शनकारियों को किसी भी कानूनी कार्रवाई से पूरी तरह छूट मिलेगी। इसी आदेश के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपना विरोध मार्च भी रद्द कर दिया था, ये कहते हुए कि उनकी मांगें पूरी हो चुकी हैं।
CJP नेता ने उठाए सवाल
अक्षत त्रिपाठी को मिले नोटिस पर CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पूछा कि क्या गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के ऐतिहासिक आदेश को पढ़ा ही नहीं है। दास का कहना था कि सभी प्रदर्शनकारियों को CJP प्रदर्शन में भाग लेने पर स्थायी और पूर्ण कानूनी छूट प्राप्त है, इसलिए अक्षत को 5 लाख रुपये का बेल बॉन्ड भरने की कोई जरूरत ही नहीं है।
फिलहाल क्या स्थिति है
प्रशासन ने बाद में यह नोटिस वापस ले लिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट अब गौतम बुद्ध नगर प्रशासन से इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब मांगेगा। अदालत के रुख से साफ है कि प्रदर्शनकारियों को दी गई कानूनी छूट को नजरअंदाज करने वाले प्रशासनिक फैसलों पर अब सख्ती बरती जाएगी।








