कुशीनगर सीएमओ कार्यालय के मुख्य गेट पर आशा कार्यकत्रियों ने जड़ा ताला,मचा हड़कंप

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कुशीनगर। आठ सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले आशा कार्यकत्रियों ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। अपनी मांगों के समर्थन में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद आशा कार्यकत्रियां मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने कार्यालय के नीचे बैठकर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। काफी देर तक प्रदर्शन के बाद भी जब सीएमओ ज्ञापन लेने के लिए नीचे नहीं पहुंचे तो कार्यकत्रियों का आक्रोश बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने सीएमओ कार्यालय के मुख्य गेट (चैनल) को बंद कर उस पर ताला जड़ दिया और गेट के सामने ही प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुख्य गेट पर ताला लगने के बाद करीब आधे घंटे तक सीएमओ कार्यालय का आवागमन पूरी तरह ठप रहा। कार्यालय के अंदर मौजूद कर्मचारी और विभिन्न कार्यों से पहुंचे फरियादी बाहर नहीं निकल पा रहे थे, जबकि बाहर मौजूद लोग और कर्मचारी अंदर नहीं जा पा रहे थे। कई लोग काफी देर तक गेट खुलने का इंतजार करते रहे। कार्यालय के काम से अंदर फंसे लोगों और प्रदर्शन कर रही आशा कार्यकत्रियों के बीच गेट खोलने को लेकर कहासुनी भी हुई, लेकिन कार्यकत्रियां अपनी मांगों पर अड़ी रहीं और गेट नहीं खोला।

सीएमओ साहब हाय-हाय से गूंजा कार्यालय परिसर

प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकत्रियों ने सीएमओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकत्रियां सीएमओ साहब हाय-हाय,सीएमओ साहब नीचे आओ,तानाशाही नहीं चलेगी-नहीं चलेगी तथा हमसे जो टकराएगा वो चूर-चूर हो जाएगा जैसे नारे लगाती रहीं। काफी देर तक चली नारेबाजी से सीएमओ कार्यालय परिसर गूंजता रहा। आशा कार्यकत्रियों का कहना था कि वे स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और अभियानों को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उनके कार्य के अनुरूप भुगतान और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कार्यकत्रियों ने कहा कि छह फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में कई मांगों को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन उन मांगों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इसी के विरोध में प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जा रहा है।

मांगें नहीं मानी गईं तो बड़े स्तर पर होगा आंदोलन

उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की जिला अध्यक्ष रीता पटेल ने कहा कि आशा कार्यकत्रियां लगातार स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और अभियानों को धरातल पर पहुंचाने का काम कर रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो आशा कार्यकत्रियां इससे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगी।
रीता पटेल ने विशेष रूप से मानदेय का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आशा कार्यकत्रियों का मानदेय 10 हजार रुपये किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यकत्रियों को उनके काम के अनुरूप मानदेय और प्रोत्साहन राशि मिलनी चाहिए तथा लंबित भुगतानों का भी शीघ्र निस्तारण किया जाना चाहिए।

समझौते के बावजूद मांगें पूरी न होने का आरोप

आशा वर्कर्स यूनियन की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कहा गया है कि छह फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री और उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधियों के बीच समझौता हुआ था। यूनियन का आरोप है कि समझौते और सहमत मांगों को लागू करने के लिए अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। यूनियन ने अपने पत्र में कहा है कि आशा कार्यकत्रियों द्वारा वर्षों से विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में काम किया जा रहा है, लेकिन कई अभियानों की प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित है। इससे कार्यकत्रियों में नाराजगी है। यूनियन ने भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए प्रत्येक सीएचसी के सूचना पट पर भुगतान का स्पष्ट ब्यौरा चस्पा करने तथा किसी प्रकार की शिकायत होने पर उसके निस्तारण की व्यवस्था विकसित करने की मांग भी उठाई है।

आधार भुगतान 10 हजार रुपये करने की मांग

ज्ञापन में छह फरवरी के समझौते को लागू करते हुए आशा कार्यकत्रियों का आधार भुगतान 10 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने तथा प्रोत्साहन राशि से संबंधित सहमत मांगों को पूरा करने की मांग रखी गई है। साथ ही आशा संगिनी के आधार भुगतान में बढ़ोतरी के वादे को पूरा करने तथा मांगपत्र की अन्य मांगों को भी लागू करने की मांग की गई है।यूनियन का कहना है कि आशा कार्यकत्रियों से स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के तहत लगातार अलग-अलग कार्य लिए जा रहे हैं। इसके बावजूद भुगतान को लेकर उन्हें बार-बार विभागीय स्तर पर दौड़ लगानी पड़ती है। संगठन ने सभी लंबित भुगतानों को समयबद्ध तरीके से जारी करने की मांग की है।

आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी के भुगतान की मांग

आठ सूत्रीय मांगों में आयुष्मान कार्ड आयुष्मान गोल्डन कार्ड और आभा आईडी में किए गए योगदान की प्रोत्साहन राशि का संपूर्ण भुगतान कराने की मांग भी शामिल है। आशा कार्यकत्रियों का कहना है कि इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार और लाभार्थियों को जोड़ने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए किए गए कार्य के एवज में देय प्रोत्साहन राशि का भुगतान जल्द किया जाना चाहिए।

अभियानों की प्रोत्साहन राशि 500 रुपये प्रतिदिन करने की मांग

यूनियन ने पोलियो, फाइलेरिया दस्तक और संचारी अभियान की प्रोत्साहन राशि को पुनरीक्षित करते हुए 500 रुपये प्रतिदिन निर्धारित करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि इन अभियानों के लिए अलग से भुगतान निर्धारित करना संभव नहीं है तो इन्हें आशा कार्यकत्रियों की नियमित कार्यसूची से अलग किया जाए। इसके अलावा सी-बैक, टीबीआई, कुष्ठ रोग, टीबी स्क्रीनिंग, पोलियो, दस्तक और संचारी अभियान समेत पिछले वर्षों के अन्य सभी लंबित भुगतानों को शीघ्र सुनिश्चित कराने की मांग की गई है। यूनियन का कहना है कि वर्षों से लंबित भुगतान के कारण कार्यकत्रियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पांच लाख चिकित्सा और 10 लाख दुर्घटना बीमा की मांग

आशा कार्यकत्रियों ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा के अतिरिक्त पांच लाख रुपये का चिकित्सा बीमा उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही दुर्घटना बीमा की राशि को दो लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई है।बयूनियन का कहना है कि आशा कार्यकत्रियां स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों के लिए लगातार गांवों और क्षेत्र में भ्रमण करती हैं। विभिन्न अभियानों के दौरान उन्हें जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में भी काम करना पड़ता है। ऐसे में उनके लिए बेहतर चिकित्सा और दुर्घटना बीमा की व्यवस्था जरूरी है।

चार माह के मातृत्व अवकाश और कमेटी गठन की मांग

ज्ञापन में आशा कार्यकत्रियों के लिए चार माह का मातृत्व अवकाश अनुमन्य किए जाने तथा जीपीएफ/पेंशन से संबंधित कमेटी का गठन किए जाने की मांग की गई है। यूनियन का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहीं आशा कार्यकत्रियों के सामाजिक और आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इस दिशा में ठोस व्यवस्था की आवश्यकता है।

आंदोलन के मुकदमे वापस लेने की मांग

आठवीं मांग के रूप में यूनियन ने 15 दिसंबर 2025 से छह फरवरी 2026 तक चले आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को समझौते के अनुसार समाप्त करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य सरकार की ओर से मुकदमे समाप्त करने की लिखित घोषणा के बावजूद सोनभद्र जिला सचिव जानकी देवी के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस नहीं लिया गया है। यूनियन ने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही 45/46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करने के लिए वैधानिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी उठाई गई है।

करीब आधे घंटे तक बंद रहा मुख्य गेट

सीएमओ कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगाए जाने के बाद स्थिति उस समय और असहज हो गई जब कार्यालय के अंदर मौजूद कर्मचारी और फरियादी बाहर नहीं निकल सके। बाहर से आने वाले लोग भी कार्यालय में प्रवेश नहीं कर पा रहे थे। इस दौरान कई लोगों ने गेट खोलने की मांग की। प्रदर्शनकारियों और कुछ लोगों के बीच कहासुनी भी हुई, लेकिन आशा कार्यकत्रियां अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। करीब आधे घंटे तक गेट बंद रहने के कारण कार्यालय का सामान्य कामकाज और आवागमन प्रभावित रहा। इससे कार्यालय पहुंचे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बाद में सीएमओ के ज्ञापन लेने और आशा कार्यकत्रियों से वार्ता करने के बाद स्थिति सामान्य हुई।

ऑनलाइन मीटिंग में व्यस्त थे सीएमओ,खत्म होते ही लिया ज्ञापन

वहीं इस पूरे मामले में सीएमओ ने बताया कि आशा कार्यकत्रियों के कार्यालय पहुंचने के समय उनकी ऑनलाइन मीटिंग चल रही थी। इसी वजह से वह तत्काल नीचे नहीं आ सके। उन्होंने बताया कि जैसे ही उनकी मीटिंग समाप्त हुई, उन्होंने आशा कार्यकत्रियों का ज्ञापन लिया। इसके बाद कार्यकत्रियों को कार्यालय के ऊपर बुलाकर बैठाया गया और उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना गया।सीएमओ ने कहा कि आशा कार्यकत्रियों की ओर से रखी गई समस्याओं और मांगों को सुना गया है तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

साजिद अंसारी पड़रौना।

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