जानकारी के मुताबिक, कार्यकारिणी बैठक में अधिवक्ताओं के बैठने को लेकर नगर आयुक्त और अन्य सदस्यों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। नगर आयुक्त ने नियमों के अनुसार बैठक संचालित करने की बात कही। इसी बीच नाराज होकर वह बैठक से बाहर चले गए। उनके बाहर निकलने के बाद पार्षदों ने विरोध जताते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।
मामले पर महापौर प्रमिला पाण्डेय ने सफाई देते हुए कहा कि बैठक में बैठे अधिवक्ता बाहरी नहीं, बल्कि नगर निगम के कानूनी मामलों से जुड़े लीगल अधिवक्ता थे। उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त द्वारा नियमों के अनुसार बैठक चलाने की बात कहे जाने पर ही अधिवक्ताओं को बैठाया गया था।
महापौर ने नगर आयुक्त पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह झूठ बोलते हैं। उन्होंने दावा किया कि फाइल पर हस्ताक्षर करके देने के बाद भी नगर आयुक्त फाइल नहीं मिलने की बात कहते हैं।
बैठक में हुए हंगामे के कारण नगर निगम के विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी। इस घटनाक्रम ने नगर निगम के कामकाज और अधिकारियों-पार्षदों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।









