देश के मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ और उसके बदले मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। बीजेपी से अलग होने के बाद शहजाद पूनावाला ने नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग से जुड़े सवालों को उठाते हुए सरकारों से टैक्स के बदले मिलने वाली सुविधाओं पर जवाबदेही की मांग की है।
पूनावाला का कहना है कि मध्यम वर्ग आयकर के साथ-साथ जीएसटी, टोल, ईंधन टैक्स और दूसरे तरह के करों के जरिए लगातार सरकार के राजस्व में योगदान देता है। ऐसे में सवाल यह है कि उसके बदले उसे सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ हवा और बेहतर नागरिक सुविधाएं कितनी मिल रही हैं।
‘मिडिल क्लास टैक्स देता है, बदले में क्या मिलता है?’
पूनावाला ने सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो और पोस्ट के जरिए कहा कि मध्यम वर्ग को अपनी मूल जरूरतों के लिए भी निजी सेवाओं पर निर्भर होना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई के लिए निजी स्कूल और परिवार के इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भारतीय नागरिक टैक्स देते हैं तो उन्हें उसी अनुपात में बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं क्यों नहीं मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, सरकारी व्यवस्था में सड़क, परिवहन, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं, साफ पानी और हवा जैसे बुनियादी मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए टैक्स में राहत की मांग
शहजाद पूनावाला ने खास तौर पर वेतनभोगी वर्ग के लिए आयकर का बोझ कम करने की मांग की है। उनका तर्क है कि सैलरी पाने वाले मध्यम वर्ग को अपनी कमाई पर भारी टैक्स देने के साथ-साथ कई अप्रत्यक्ष कर भी चुकाने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक देश में विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक नौकरीपेशा मध्यम वर्ग को व्यक्तिगत आयकर में राहत देने पर विचार किया जाना चाहिए।
हर रुपये के इस्तेमाल पर हो जवाबदेही
पूनावाला ने केवल टैक्स कम करने की बात नहीं की, बल्कि सरकारी खर्च की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि जनता से वसूले गए पैसे का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इसकी स्पष्ट जवाबदेही होनी चाहिए।
उनके सवालों ने एक पुराने लेकिन अहम मुद्दे को फिर सामने ला दिया है—क्या टैक्स देने वाले नागरिकों को उनके योगदान के अनुरूप सार्वजनिक सुविधाएं मिल रही हैं? यह सवाल किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की कर व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी व्यापक बहस का हिस्सा है।
फिलहाल, पूनावाला के बयान के बाद सोशल मीडिया पर मध्यम वर्ग के टैक्स बोझ और सरकारी सुविधाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।









