भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है। तावड़े के सामने अब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी होगी। उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।
विनोद तावड़े की नई जिम्मेदारी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि करीब सात साल पहले महाराष्ट्र की राजनीति में उन्हें बड़ा झटका लगा था। 2019 के विधानसभा चुनाव में उनका टिकट काट दिया गया था। इसके बाद ऐसा माना जाने लगा था कि उनका सक्रिय चुनावी राजनीतिक सफर कमजोर पड़ गया है। हालांकि, तावड़े ने संगठन में काम जारी रखा और धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह मजबूत की।
ABVP से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
विनोद तावड़े ने छात्र राजनीति के जरिए अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। RSS से भी उनका पुराना जुड़ाव रहा है।
महाराष्ट्र बीजेपी में संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बाद वह मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष बने। इसके बाद महाराष्ट्र विधान परिषद में पहुंचे और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाई। 2014 में बोरीवली विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने के बाद उन्हें महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बनाया गया।
2019 में टिकट कटा, लेकिन दिल्ली की राजनीति में बनाई जगह
2019 का विधानसभा चुनाव तावड़े के राजनीतिक करियर के लिए बड़ा मोड़ साबित हुआ। टिकट कटने के बाद उन्होंने सार्वजनिक तौर पर किसी बड़े टकराव का रास्ता नहीं चुना और संगठन में काम करते रहे।
इसके बाद उन्हें बीजेपी में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियां मिलीं। 2021 में वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने और हरियाणा के प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके बाद उनका राजनीतिक प्रभाव महाराष्ट्र से बाहर राष्ट्रीय संगठन तक फैलता गया।
बिहार में मिली सफलता ने बढ़ाया भरोसा
तावड़े को 2022 में बिहार बीजेपी का प्रभारी बनाया गया। इसके बाद बिहार की राजनीति में उनके संगठनात्मक प्रबंधन को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना गया। सहयोगी दलों के साथ तालमेल और सीट बंटवारे जैसे मुद्दों को संभालने में उनकी भूमिका रही।
अब बीजेपी ने उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी दी है। पार्टी ने यूपी के साथ-साथ पंजाब और गुजरात के लिए भी नए प्रभारियों की नियुक्ति की है।
यूपी में तावड़े के सामने क्या चुनौतियां?
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगा। पार्टी के सामने संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने और चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाने की चुनौती रहेगी।
इसके अलावा सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय, अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पार्टी की पहुंच और 2024 लोकसभा चुनाव के बाद संगठन को फिर से मजबूत करना भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल माना जा रहा है।
विनोद तावड़े के राजनीतिक सफर को देखें तो 2019 में चुनावी राजनीति से दूर होने के बाद उनका राष्ट्रीय संगठन में लगातार ऊपर बढ़ना बीजेपी की संगठन आधारित राजनीति का एक अहम उदाहरण माना जा सकता है। अब यूपी की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक करियर का एक और बड़ा पड़ाव होगी।









