प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जहदा: सुविधाओं के अभाव में सिसक रहा अस्पताल, पेयजल और बाउंड्रीवॉल न होने से मरीज परेशान

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​प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) जहदा इस समय बुनियादी सुविधाओं के भारी अभाव से जूझ रहा है। परिसर में बाउंड्रीवॉल का न होना, चारों तरफ फैली गंदगी और पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था न होने से यहां आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
​सुविधाओं की बदहाली का आलम यह है कि कुछ महीने पहले स्थानीय समाजसेवी एडवोकेट हरेंद्र यादव ने भी इसकी लिखित शिकायत उच्च अधिकारियों से की थी। शिकायत के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति तो कुछ हद तक सुनिश्चित हुई, लेकिन मूल समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
​नल खराब, प्रधान और डॉक्टर के बयानों में उलझा पानी का मुद्दा
​अस्पताल के ठीक सामने लगा नल पिछले कई महीनों से खराब पड़ा है। पेयजल संकट पर जब केंद्र के डॉक्टर राकेश कुमार सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि लगभग 15 दिन पहले नल का ऊपरी हिस्सा टूट जाने के कारण वह खराब हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इसकी मरम्मत के लिए ग्राम प्रधान को सूचित कर दिया गया है।
​हालांकि, इस मामले में नया मोड़ तब आया जब ग्राम प्रधान शाकिर अली से सवाल किया गया। ग्राम प्रधान ने डॉक्टर के दावों को खारिज करते हुए कहा, “मुझे नल खराब होने की कोई जानकारी नहीं है। अगर हैंडपंप खराब होता तो मैं मरम्मत करवा देता, लेकिन नल बनवाना मेरा काम नहीं है।” जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की इस खींचतान के बीच मरीज पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।
​​अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे कुछ मरीजों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां डॉक्टर भी कई-कई दिनों तक गायब रहते हैं। परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह ठप है और सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल तक नहीं है। बुनियादी सुविधाएं न होने के कारण अब ग्रामीणों ने अस्पताल आना बहुत कम कर दिया है।
​​पूरे मामले पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर राकेश कुमार सिंह का कहना है कि बाउंड्रीवॉल न होने और अस्पताल के ठीक सामने नल खराब रहने से मरीजों को वाकई समस्या हो रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है और जल्द ही समाधान की उम्मीद है।
​अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर जहदा के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिला पाता है या मरीज यूं ही बदहाली के आंसू रोने को मजबूर रहेंगे।

रिपोर्टर अरुणेश कुमार गुप्त

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