NEET पेपर लीक केस को लेकर बनाई गई फास्ट ट्रैक कोर्ट अपने पहले ही दिन उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। सोमवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई शुरू होनी थी, तब पता चला कि CBI की तरफ से कोई वकील अदालत में मौजूद ही नहीं है। नतीजा यह हुआ कि पूरी कार्यवाही टालनी पड़ी।
जमानत याचिकाएं भी लटकीं
इस दिन आरोपी विकास और दिनेश बिवाल की जमानत अर्जियों पर भी सुनवाई प्रस्तावित थी। लेकिन वकील की अनुपस्थिति के चलते इन पर भी कोई फैसला नहीं हो सका। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए Director of Prosecution को तुरंत एक Public Prosecutor नियुक्त करने के निर्देश दिए, ताकि आगे ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
3 अगस्त पर टिकी निगाहें
अब मामले की सुनवाई 3 अगस्त को होगी। कोर्ट को उम्मीद है कि तब तक अभियोजन पक्ष अपनी तरफ से वकील की नियुक्ति पूरी कर लेगा, जिससे केस आगे बढ़ सके।
कैसे आया फास्ट ट्रैक कोर्ट का विचार
बता दें कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों और NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब डेढ़ महीने तक विरोध-प्रदर्शन चला था। इसी दबाव के बाद PM मोदी ने Instagram पर लाइव सेशन में छात्रों से सीधा संवाद किया और पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने साफ कहा था कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को सख्त सजा मिलेगी।
कानून में भी समयसीमा तय, पर अमल नदारद
संसद में पेश पेपर लीक रोकथाम बिल में यह प्रावधान भी है कि चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना होगा। लेकिन फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत ही अगर वकील की गैरमौजूदगी से अटक जाए, तो इस तय समयसीमा पर सवाल उठना लाज़मी है।









