बांकीपुर में कम वोटिंग ने बढ़ाया सस्पेंस, क्या बदलेगा बीजेपी-आरजेडी और जन सुराज का चुनावी गणित?

बांकीपुर उपचुनाव में 34.30 प्रतिशत मतदान के बीच बीजेपी, आरजेडी और जन सुराज के चुनावी मुकाबले को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर।

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बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मतदान का प्रतिशत उम्मीद से काफी कम रहा। निर्वाचन आयोग के अनुसार सीट पर 34.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान समाप्त होने के साथ ही अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि कम वोटिंग का फायदा आखिर किस दल को मिलेगा और किसकी रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है।

कम मतदान ने बढ़ाए सवाल

बांकीपुर पटना का प्रमुख शहरी विधानसभा क्षेत्र है। शहरी सीटों पर अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में मतदान कम रहता है, लेकिन इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने के कारण अधिक मतदान की उम्मीद जताई जा रही थी। इसके बावजूद वोटिंग का आंकड़ा 35 प्रतिशत से नीचे रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कम मतदान का सीधा मतलब किसी एक दल की बढ़त नहीं होता। असली असर इस बात पर निर्भर करता है कि किस पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक अधिक संख्या में मतदान केंद्र तक पहुंचा।

बीजेपी के लिए क्या संकेत?

बांकीपुर को लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। ऐसे में पार्टी की उम्मीद अपने कोर वोटरों पर टिकी होगी। यदि समर्थक बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंचे हैं, तो कम वोटिंग बीजेपी के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है।

हालांकि यदि शहरी मतदाताओं की उदासीनता बीजेपी के समर्थकों में भी देखने को मिली, तो मुकाबला पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आरजेडी के सामने बड़ी चुनौती

आरजेडी इस सीट पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश में है। पार्टी के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या वह अपने समर्थकों को मतदान केंद्र तक लाने में सफल रही।

अगर विपक्षी वोटर अपेक्षा से कम संख्या में बाहर निकले हैं तो इसका असर परिणाम पर पड़ सकता है। वहीं यदि आरजेडी का वोट बैंक संगठित रहा, तो कम मतदान के बावजूद मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

जन सुराज के लिए अहम परीक्षा

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के लिए यह उपचुनाव संगठन की ताकत परखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। पार्टी ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी और शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की।

अब देखना होगा कि यह मेहनत वोटों में बदल पाई या नहीं। यदि जन सुराज नए मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने में सफल रही, तो चुनाव परिणाम पारंपरिक समीकरणों को बदल सकते हैं।

नतीजों पर टिकी निगाहें

मतदान समाप्त होने के बाद सभी उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो चुकी है। अब सबकी नजर मतगणना पर है, जहां यह स्पष्ट होगा कि कम मतदान ने किस दल की रणनीति को सफल बनाया और किसके लिए यह चिंता का विषय बन गया।

बांकीपुर का यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीति और नए राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।

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