झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का गुस्सा सोमवार को अपने चरम पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले रविवार को सरकार और छात्र संगठनों के बीच तीन दौर में लगभग पांच घंटे चली लंबी बातचीत भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी, जिसके बाद छात्रों ने पूर्व-निर्धारित ‘विधानसभा घेराव’ कार्यक्रम पर आगे बढ़ने का ऐलान कर दिया।
बैरिकेड तोड़ते, पानी में नाचते आगे बढ़े छात्र
सोमवार सुबह छात्र संगठनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पुरानी विधानसभा के पास इकट्ठा हुए और वहां से नई विधानसभा भवन की ओर पैदल मार्च शुरू किया। रास्ते में पुलिस ने कुल सात जगह बैरिकेडिंग लगा रखी थी, लेकिन उत्साहित छात्रों ने एक के बाद एक छह बैरिकेड तोड़ डाले। जब आखिरी और सातवें बैरिकेड के पास पुलिस ने वाटर कैनन का सहारा लिया, तो छात्र घबराने के बजाय उसी पानी में जश्न मनाने लगे और ‘और चलाओ’ के नारे लगाते रहे।
घेराव को देखते हुए रांची प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की थी। विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में धारा 163 लागू कर दी गई थी, जबकि 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों समेत IRB और QRT की टुकड़ियां मौके पर तैनात रहीं। सोशल मीडिया पर ‘पैलेट गन’ इस्तेमाल किए जाने की अफवाहों को खारिज करते हुए पुलिस अधिकारियों ने साफ किया कि प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए सिर्फ ‘पेंटबॉल गन’ का उपयोग हो रहा है।
सरकार बोली- 98% मांगें मानी, पर CBI जांच पर टिका विवाद
रविवार की वार्ता में झारखंड सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा मौजूद थे। सरकार का कहना है कि छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगें स्वीकार कर ली गई हैं, जिसमें 14वीं JPSC पीटी परीक्षा और ACF परीक्षा को रद्द करना और TDPL एजेंसी की परीक्षाओं की जांच शामिल है। बावजूद इसके, छात्र नेता JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और मामले की CBI जांच की मांग पर कायम रहे। सरकार का तर्क है कि यह परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी, इसलिए राज्य के पास इसे रद्द करने या CBI जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है। इसके एवज में सरकार ने ED जांच, रिटायर्ड जज की अगुवाई में समिति और 90 दिन में रिपोर्ट देने वाली फास्ट-ट्रैक अदालत का प्रस्ताव दिया, जिसे छात्रों ने सिरे से नकार दिया।
जयराम महतो पहुंचे धरनास्थल, छात्रों ने उठाया गोद में
आंदोलन के बीच डुमरी विधायक जयराम महतो विधानसभा से बाहर निकलकर सीधे प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंच गए और उनके साथ एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि वे छात्रों की आवाज सदन के भीतर और सड़क, दोनों जगह उठाते रहेंगे। भावुक हुए छात्रों ने उन्हें गोद में उठा लिया, जिसके बाद वे भी परिसर में जमीन पर बैठकर धरने में शामिल हो गए।
इस दौरान एक भावुक दृश्य भी सामने आया, जब नौ दिनों से अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो एंबुलेंस से कमजोर हालत में मार्च में पहुंचे। छात्रों ने उन्हें कंधे पर उठाकर फूलों से उनका स्वागत किया।
भाजपा का प्रदर्शन, बाबूलाल मरांडी हिरासत में
छात्रों के समर्थन में भाजपा भी सड़क पर उतर आई। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास घेरने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। मरांडी ने बाद में सरकार को “तानाशाह” बताते हुए कहा कि छात्रों को न्याय दिलाने तक भाजपा की लड़ाई जारी रहेगी।
JPSC के तीन सदस्यों ने दिया इस्तीफा
आंदोलन के बीच एक अहम घटनाक्रम में झारखंड लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों — अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनिमा हांसदा — ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया। डॉ. भट्टाचार्य से इसी दिन पूछताछ भी तय थी।
छात्र नेताओं ने दोहराया कि जब तक TDPL की परीक्षाएं और JSSC-CGL परीक्षा रद्द नहीं होतीं और CBI जांच का लिखित आदेश नहीं मिलता, आंदोलन थमने वाला नहीं है।









