झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भर्ती गड़बड़ियों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को सरकार और आंदोलनरत छात्र संगठनों के बीच गतिरोध सुलझाने के लिए दूसरे दौर की वार्ता हुई, लेकिन यह मीटिंग भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। छात्रों ने साफ रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा।
बातचीत क्यों रही नाकाम?
झारखंड सरकार की तरफ से गठित मंत्रियों के उच्चस्तरीय दल ने शनिवार को छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात कर मामले को सुलझाने की पूरी कोशिश की। हालांकि छात्र अपनी मुख्य और पुरानी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे। सरकार के तर्क और भरोसे उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाए। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार रात हुई पहली बातचीत भी बेनतीजा साबित हुई थी, यानी अब तक दोनों दौर की वार्ता असफल रही है।
अब रविवार दोपहर होगी अगली बैठक
बातचीत के दो दौर विफल होने के बावजूद संवाद का सिलसिला टूटा नहीं है। झारखंड सरकार में मंत्री संजय यादव ने जानकारी दी कि रविवार दोपहर 12 बजे छात्र प्रतिनिधियों के साथ फिर से बातचीत होगी। माना जा रहा है कि इस अगली मीटिंग में सरकार छात्रों को मनाने के लिए कुछ नए प्रस्ताव भी रख सकती है, ताकि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से खत्म हो सके।
बता दें कि झारखंड में JPSC और JSSC सरीखी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और नियुक्तियों में अनियमितता को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलनरत हैं। बड़ी तादाद में अभ्यर्थी रांची में जमे हुए हैं और लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगें हैं—परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना, पेपर लीक मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराना और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना। छात्रों का कहना है कि उन्हें सिर्फ मौखिक भरोसा नहीं, बल्कि लिखित गारंटी चाहिए।
जयराम महतो का समर्थन, कल से अनशन
इस बीच छात्र आंदोलन को सियासी समर्थन भी मिलने लगा है। स्थानीय विधायक और जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो ने ऐलान किया है कि वे 9 अगस्त को छात्रों के समर्थन में एक दिन का निर्जला अनशन करेंगे।
रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र पिछले कई दिनों से धरना और भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी संघर्ष को मजबूती देने के इरादे से विधायक जयराम महतो 9 अगस्त सुबह 6 बजे से पुराने विधानसभा परिसर में निर्जला उपवास शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा सत्र 12 तारीख को खत्म होने के बाद वे पूरी ताकत के साथ इस आंदोलन में उतरेंगे।
राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों का साथ मिलने से यह आंदोलन अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। अब तक की बातचीत में कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है, जिससे छात्रों की नाराजगी लगातार बनी हुई है।









