नई दिल्ली/बेंगलुरु। चंद्रमा पर इंसानों की लंबे समय तक मौजूदगी स्थापित करने की दिशा में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। NASA ने भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO को अपने महत्वाकांक्षी ‘Moon Base Programme’ में शामिल होने का न्योता दिया है। यह प्रस्ताव भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
यह न्योता बेंगलुरु में आयोजित 9वीं भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (U.S.-India Civil Space Joint Working Group) की बैठक के दौरान सामने आया। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि Moon Base में भारत और ISRO की भूमिका क्या होगी या भारत किस स्तर पर इसमें योगदान देगा।
*क्या है NASA का Moon Base Programme?*
NASA के मुताबिक Moon Base का लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास इंसानों की लंबे समय तक मौजूदगी के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार करना है। इसके लिए रोबोटिक और मानव मिशनों की एक श्रृंखला के जरिए धीरे-धीरे बिजली, संचार, परिवहन, रोबोटिक्स, आवास और दूसरे जरूरी सिस्टम विकसित किए जाएंगे।
चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां वैज्ञानिकों को पानी की बर्फ और दूसरे उपयोगी संसाधनों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। NASA भविष्य के मिशनों के लिए इन संसाधनों का अध्ययन और उपयोग करना चाहता है।
NASA का मकसद सिर्फ चंद्रमा पर दोबारा पहुंचना नहीं, बल्कि वहां लंबे समय तक वैज्ञानिक और मानवीय गतिविधियां संचालित करने की क्षमता विकसित करना है। इस अनुभव को आगे चलकर मंगल समेत दूसरे गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है।
*चंद्रयान-3 के बाद भारत की बढ़ी भूमिका*
भारत ने 2023 में चंद्रयान-3 के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इसके बाद भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमता को लेकर वैश्विक स्तर पर रुचि बढ़ी है।
भारत और अमेरिका पहले से ही अंतरिक्ष क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर सहयोग कर रहे हैं। NISAR संयुक्त उपग्रह मिशन इसका प्रमुख उदाहरण है। इसके अलावा ISRO और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA के बीच चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन LUPEX पर भी सहयोग चल रहा है, जिसमें NASA का एक उपकरण चंद्रमा की सतह के नीचे बर्फ की खोज में मदद करेगा।
*Artemis Accords से मजबूत हुई साझेदारी*
भारत ने 2023 में Artemis Accords पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता चंद्रमा, मंगल और अन्य अंतरिक्ष अभियानों में शांतिपूर्ण, सुरक्षित और जिम्मेदार सहयोग के लिए एक साझा ढांचा उपलब्ध कराता है। जुलाई 2026 तक 70 देश Artemis Accords में शामिल हो चुके हैं।
NASA अब इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत Moon Base को आगे बढ़ा रहा है। एजेंसी का कहना है कि चंद्रमा पर लंबे समय तक इंसानी मौजूदगी स्थापित करने का यह प्रयास किसी एक देश के लिए संभव नहीं है और इसमें अंतरराष्ट्रीय तथा वाणिज्यिक साझेदारों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
*भारत के लिए क्यों अहम है यह न्योता?*
अगर भारत की भागीदारी इस कार्यक्रम में आगे बढ़ती है, तो ISRO को चंद्रमा पर भविष्य के मानव मिशनों, रोबोटिक्स, वैज्ञानिक अनुसंधान और चंद्र संसाधनों से जुड़ी तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण अवसर मिल सकते हैं।
भारत का अपना दीर्घकालिक अंतरिक्ष विजन भी चंद्रमा और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ा हुआ है। ऐसे में NASA का यह न्योता भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के अगले चरण की शुरुआत माना जा सकता है।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बनने वाले Moon Base में भारत की कितनी और किस प्रकार की भागीदारी होगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि NASA भारत को चंद्रमा पर भविष्य की दीर्घकालिक गतिविधियों में संभावित महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रहा है।
अगर यह सहयोग ठोस रूप लेता है, तो आने वाले वर्षों में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत और अमेरिका की साझी वैज्ञानिक और तकनीकी मौजूदगी अंतरिक्ष इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकती है।









