देश के 21 प्रमुख डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स ने डेटा प्रोटेक्शन कानून को चुनौती दी है| उनका कहना है कि इससे खोजी पत्रकारिता और गोपनीयता प्रभावित हो सकती है|
केंद्र सरकार से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून को लेकर मीडिया संस्थानों की याचिका पर सुनवाई हुई| डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की ओर से दाखिल इस याचिका में कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी गई है| इसमें रिलायंस समूह के Network18 और अडानी समूह के NDTV समेत 21 प्रमुख डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स शामिल हैं| 27 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा| अदालत ने फिलहाल सरकार का पक्ष सुने बिना कानून पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया| मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी|
खोजी पत्रकारिता पर असर की आशंका
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून में पत्रकारिता के काम के लिए स्पष्ट छूट नहीं होने से भ्रष्टाचार, घोटालों और अनियमितताओं की जांच करने में मुश्किलें आ सकती हैं| उनका तर्क है कि व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल से जुड़े सहमति संबंधी नियमों के कारण पत्रकारों को किसी व्यक्ति के बारे में जानकारी प्रकाशित करने से पहले उसकी अनुमति लेने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है| मीडिया संस्थानों को आशंका है कि इससे जांच की खबरें प्रकाशित करने से पहले ही संबंधित व्यक्ति को जानकारी मिल सकती है, जिससे सबूत जुटाने और तथ्यों की पुष्टि करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है|
सूत्रों की गोपनीयता पर भी सवाल
याचिका में DPDP कानून की धारा 36 के तहत केंद्र सरकार को मिलने वाली सूचना मांगने की शक्तियों पर भी चिंता जताई गई है| पब्लिशर्स का कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के अभाव में पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों और व्हिसलब्लोअर्स की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हो सकता है| इसके अलावा, डेटा हटाने के अधिकार के संभावित दुरुपयोग से प्रकाशित खबरों को हटाने की मांग बढ़ने की आशंका भी जताई गई है|अब इस मामले में केंद्र सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा|









