पंजाब की राजनीति एक बार फिर परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी को लेकर सुर्खियों में है। बात दरअसल उस समय शुरू हुई जब केंद्र में शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान को पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के भारी दबाव में इस्तीफा देना पड़ा। इस घटना का असर सीधे पंजाब की सियासत पर पड़ा, जहां विपक्षी पार्टियों ने राज्य सरकार को भी इसी तराजू पर तौलना शुरू कर दिया।
मामला कहां से शुरू हुआ
19 जुलाई को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने फार्मेसी ऑफिसर के 454 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित करवाई थी। परीक्षा के बीच ही अधिकारियों को शक हुआ कि कुछ अभ्यर्थी तकनीक के सहारे नकल कर रहे हैं। जांच में सामने आया कि कैमरा फिट पेन का इस्तेमाल कर प्रश्न पत्र की फोटो खींची गई, फिर वॉट्सऐप से बाहर भेजकर ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए जवाब मंगवाए गए। फरीदकोट, कोटकपूरा और फिरोजपुर के परीक्षा केंद्रों से यह खेल पकड़ में आया और पुलिस ने मौके से करीब तीन दर्जन लोगों को हिरासत में लिया।
सरकार बनाम विपक्ष
जैसे ही यह खबर फैली, कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल ने एक सुर में राज्य के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी। तर्क यह दिया गया कि जब नैतिकता के आधार पर केंद्रीय मंत्री पद छोड़ सकते हैं, तो राज्य में भी वही मापदंड लागू होना चाहिए। भाजपा नेताओं ने तो यहां तक कह डाला कि आम आदमी पार्टी दूसरों पर सवाल उठाने में आगे रहती है, लेकिन अपने राज्य में गड़बड़ी पर चुप्पी साध लेती है।
सरकार की तरफ से पलटवार करते हुए कहा गया कि यह मामला किसी परंपरागत पेपर लीक जैसा नहीं है। पार्टी की दलील है कि न तो प्रश्न पत्र पहले लीक हुआ, न किसी अफसर की संलिप्तता मिली — बल्कि यह नकल की एक कोशिश थी, जिसे मौके पर ही पकड़ लिया गया। खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसी आधार पर मंत्री के इस्तीफे की मांग सिरे से खारिज कर दी।
वहीं मंत्री हरजोत बैंस ने अपनी सफाई में कहा कि यह विषय सीधे उनके विभाग की जिम्मेदारी का नहीं है, फिर भी अगर उनके पद छोड़ने से व्यवस्था सुधरती दिखे तो वे इस्तीफा देने में संकोच नहीं करेंगे।
सड़कों पर उतरा गुस्सा
फरीदकोट में सोमवार को हालात तब गरमाए जब यूथ अकाली दल और छात्र संगठन SOI के कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर धरना दिया और मंत्री बैंस के साथ स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के इस्तीफे की भी मांग रख दी। इसी बीच चंडीगढ़ में भाजपा के छात्र विंग ABVP ने मुख्यमंत्री आवास घेरने और पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन तेज करने का ऐलान कर दिया।
एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बयान दिया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर भी रणनीति बना रही है, हालांकि जंतर-मंतर वाला आंदोलन अभी खत्म ही हुआ है, इसलिए अगला कदम तय होने में कुछ समय लगेगा।
पुराने मामलों की फेहरिस्त लंबी
गौर करने वाली बात यह है कि 2022 में AAP सरकार बनने के बाद से पंजाब में यह छठा बड़ा परीक्षा/भर्ती विवाद है। इससे पहले नायब तहसीलदार भर्ती, टीचर पात्रता परीक्षा, 12वीं बोर्ड की अंग्रेजी परीक्षा, कृषि विकास अधिकारी भर्ती और ग्रुप-B कंबाइंड परीक्षा — इन सभी में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। अनुमान है कि इन घोटालों से अब तक करीब 5 लाख युवा प्रभावित हो चुके हैं।
आगे की राह
राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के चलते विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने में जुटा है। कांग्रेस प्रदेश प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पहले ही राज्यव्यापी अभियान का संकेत दे चुके हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार अपने मंत्री का बचाव कब तक कर पाती है।









