महराजगंज। जिले के सोहगीबरवा ग्राम सभा में पिछले करीब दो वर्षों से विकास योजनाओं के नाम पर कथित अनियमितताओं और धन उगाही के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामदास कुशवाह द्वारा आवास योजना और सोलर लाइट लगवाने के नाम पर लोगों से पैसे लिए जा रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजनाक्ष एव शौचालय का लाभ दिलाने के नाम पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को कथित तौर पर भ्रमित किया जाता है और उनसे रकम की मांग की जाती है। कई ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से आवास की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन उन्हें लाभ मिलने के बजाय कथित रूप से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सोलर लाइट के नाम पर भी सवाल ?
ग्राम सभा में सोलर लाइट लगाने को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि सोलर लाइट लगवाने के नाम पर भी कथित तौर पर धन की वसूली की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली स्थिति पैदा हो गई है।
“अधिकारियों से सेटिंग है”—ग्रामीणों का आरोप ?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब ग्रामीणों ने कथित वसूली को लेकर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि से सवाल किया तो कथित तौर पर उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि “हमारी अधिकारियों से सेटिंग है।” हालांकि इस कथन और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह आरोप सही हैं तो यह न केवल सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल है, बल्कि उन गरीब परिवारों के साथ भी अन्याय है जो सरकारी सहायता के भरोसे जीवन गुजार रहे हैं।

दो साल से शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार?
ग्रामीणों का दावा है कि कथित अनियमितताओं की शिकायतें लगातार उठाई जा रही हैं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन इसकी जांच कराकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग.
सोहगीबरवा ग्राम सभा के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से आवास योजना, सोलर लाइट, ग्राम पंचायत में हुए भुगतान, लाभार्थियों की सूची तथा पिछले दो वर्षों के विकास कार्यों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच/ऑडिट कराने की मांग की है।
गरीब ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाएं उनके अधिकार और राहत का माध्यम हैं, किसी भी प्रकार की कथित वसूली का जरिया नहीं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेकर जांच कराता है या फिर शिकायतें सरकारी दफ्तरों की फाइलों में ही दबकर रह जाती हैं।
नोट: उपरोक्त समाचार में लगाए गए आरोप ग्रामीणों के कथित दावों पर आधारित हैं।








