नारायणी नदी के कटान से ग्रामीणों में दहशत, ठोकर नंबर तीन पर एक-एक कर नदी में समा रहे सुरक्षा ब्लॉक

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कुशीनगर। खड्डा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत मदनपुर सुकरौली स्थित ठोकर नंबर तीन पर नारायणी नदी का कटान लगातार गंभीर होता जा रहा है। नदी के तेज बहाव और कटान के चलते तट की सुरक्षा के लिए लगाए गए ब्लॉक एक-एक कर नदी में समाते जा रहे हैं। इससे नदी किनारे बसे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते कटान पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकट हो सकती है।

नदी के कटान का असर ठोकर के आसपास साफ दिखाई दे रहा है। सुरक्षा के लिए लगाए गए कई ब्लॉक कटकर अपनी जगह से हट चुके हैं और नदी की धारा में विलीन हो रहे हैं। वहीं नदी किनारे स्थित पीपल के चबूतरे में भी दरारें पड़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे कटान से तट कमजोर होता जा रहा है और कभी भी बड़ा हिस्सा नदी की धारा में समा सकता है।

कटान की जानकारी मिलने के बाद भाजपा खड्डा मंडल अध्यक्ष संदीप श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। उन्होंने मौके की स्थिति से बाढ़ खंड के अधिकारियों को अवगत कराते हुए कटान रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि नदी के बढ़ते कटान को नजरअंदाज करना आसपास के ग्रामीणों के लिए भारी पड़ सकता है।

रात में कटान की आवाज से सहमे ग्रामीण

कटान के चलते ग्रामीणों में सबसे अधिक भय रात के समय बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार नदी की धारा से कटान की आवाज लगातार सुनाई देती है। तेज आवाज सुनकर लोगों को आशंका बनी रहती है कि कहीं नदी का पानी तट की ओर तेजी से न बढ़ जाए। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में ग्रामीणों की चिंता और बढ़ जाती है। कई लोग रात में ठीक से सो नहीं पाते और नदी की स्थिति पर नजर बनाए रखते हैं।

ग्रामीण उपेंद्र राजभर ने कहा कि ठोकर नंबर तीन पर कटान की स्थिति बेहद चिंताजनक है। सुरक्षा के लिए लगाए गए ब्लॉक लगातार नदी में गिर रहे हैं, लेकिन कटान रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले समय में आसपास के लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।

वहीं ग्रामीण नेउर चौहान और जंगी बांसफोड़ ने आरोप लगाया कि जब नदी में पानी कम रहता है और कटान शुरू होता है, तब जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। उनका कहना है कि बाढ़ के दौरान जब पानी का दबाव बढ़ जाता है, तब अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं और बोरे तथा जाली लगाकर कटान रोकने का प्रयास किया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार तेज धारा के कारण जाली और लगाए गए अन्य सुरक्षा इंतजाम भी नदी में बह जाते हैं।

ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की उठाई मांग

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ और कटान के समय अस्थायी इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण समस्या दोबारा खड़ी हो जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से ठोकर नंबर तीन के संवेदनशील हिस्से का तत्काल निरीक्षण कराकर वैज्ञानिक एवं स्थायी तरीके से कटान रोकने की व्यवस्था कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि नारायणी नदी का रुख यदि इसी तरह तट की ओर बना रहा तो आने वाले समय में नदी किनारे के क्षेत्र में खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और बाढ़ खंड के अधिकारियों को स्थिति को गंभीरता से लेते हुए समय रहते सुरक्षा उपाय करने की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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