महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने प्रशासनिक कामकाज से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए Maharashtra Government Rules of Business, 2026 के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सार्वजनिक हित में किसी भी मंत्री के फैसले को बदलने या उसे ओवरराइड करने का अधिकार मिल गया है। हालांकि, अर्ध-न्यायिक मामलों को इस अधिकार से बाहर रखा गया है।
नए नियमों के मुताबिक किसी विभाग के कामकाज और फैसलों के लिए संबंधित मंत्री मुख्य रूप से जिम्मेदार होंगे। लेकिन अगर किसी मामले में सार्वजनिक हित जुड़ा हो तो मुख्यमंत्री उस फैसले में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री को अपने फैसले के कारण लिखित रूप में दर्ज करने होंगे।
मुख्यमंत्री मांग सकेंगे किसी भी विभाग की फाइल
नियमों में मुख्यमंत्री की प्रशासनिक पहुंच को भी स्पष्ट किया गया है। अगर किसी विभाग से जुड़ी फाइल या किसी मामले के दस्तावेज मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं तो वे उन्हें मंगवा सकते हैं। संबंधित मंत्री और विभाग के सचिव को ये दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। मुख्य सचिव को भी किसी विभाग के सचिव से जरूरी कागजात मांगने का अधिकार दिया गया है।
2023 के हाई कोर्ट फैसले के बाद बदले नियम
इस बदलाव की पृष्ठभूमि में 2023 का बॉम्बे हाई कोर्ट का एक फैसला भी अहम माना जा रहा है। चंद्रपुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक से जुड़े मामले में अदालत ने कहा था कि उस समय लागू Rules of Business के तहत मुख्यमंत्री के पास संबंधित मंत्री के फैसले की स्वतंत्र रूप से समीक्षा या उसमें बदलाव करने का स्पष्ट अधिकार नहीं था। मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा तत्कालीन सहकारिता मंत्री के आदेश पर रोक लगाने से जुड़ा था।
अब नए नियमों में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की शक्ति को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इससे महाराष्ट्र सरकार में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच प्रशासनिक अधिकारों का संतुलन एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
फिलहाल इस बदलाव का सबसे बड़ा असर यही है कि सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में अंतिम प्रशासनिक हस्तक्षेप का अधिकार मुख्यमंत्री के पास रहेगा, जबकि विभागीय मंत्री अपने-अपने विभाग के सामान्य कामकाज के लिए जिम्मेदार बने रहेंगे।









