ईरान पर और सख्ती की तैयारी? ट्रंप के अगले कदम से बढ़ सकता है आर्थिक संकट
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। युद्ध और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही भारी दबाव में है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से और सख्त कदम उठाए जाने की आशंका ने तेहरान की चिंता बढ़ा दी है।
ईरान में महंगाई, मुद्रा पर दबाव और कारोबार से जुड़ी मुश्किलें बढ़ रही हैं। ऐसे में अगर अमेरिका प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ाता है या ईरान के तेल कारोबार पर और शिकंजा कसता है, तो इसका सीधा असर देश की कमाई और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है।
चीन कनेक्शन भी अहम
ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए चीन एक महत्वपूर्ण कारोबारी साझेदार है, खासकर तेल के मामले में। इसी वजह से अमेरिका की रणनीति में चीन भी अहम भूमिका निभा सकता है। ईरानी तेल की खरीद या उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने वाले नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने से तेहरान की आय को और नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो सकती है।
अमेरिका पहले भी ईरानी तेल से जुड़े चीन स्थित कारोबार और शिपिंग नेटवर्क पर प्रतिबंध लगा चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में चीन से जुड़े कारोबार पर अमेरिकी दबाव बढ़ना इस पूरे संकट का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।
हॉरमुज का संकट बढ़ा तो दुनिया पर असर
ईरान-अमेरिका तनाव का सबसे बड़ा आर्थिक असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका रहती है।
18 अगस्त को तनाव बढ़ने के बीच ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहने पर दुनिया के कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है और ब्याज दरों पर भी दबाव बन सकता है।
ईरान के सामने बढ़ती आर्थिक चुनौती
ईरान पहले से ही लंबे समय से प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। अब युद्ध, व्यापारिक पाबंदियों और तेल निर्यात को लेकर बढ़ते दबाव ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अगला कदम क्या उठाता है। अगर प्रतिबंधों के साथ चीन और अन्य देशों के कारोबार पर भी सख्ती बढ़ी, तो तेहरान की आर्थिक मुश्किलें और गहरी हो सकती हैं।









