आवास के नाम पर पांच हजार रुपये लेने का आरोप, पैसे मांगने पर मारपीट का वीडियो हुआ था वायरल

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महराजगंज। सिंदुरिया थाना क्षेत्र के रतनपुर गांव निवासी सात माह की गर्भवती महिला ने गांव के पूर्व ग्राम प्रधान समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता राबिया खातून ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर सरकारी आवास दिलाने के नाम पर पांच हजार रुपये लेने, रकम वापस मांगने पर पति के साथ मारपीट करने तथा बीच-बचाव करने पहुंची महिला के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।

पीड़िता के अनुसार, गांव के पूर्व ग्राम प्रधान ने उसके पति से सरकारी आवास दिलाने के नाम पर गूगल-पे के माध्यम से पांच हजार रुपये लिए थे। आरोप है कि उन्होंने 15 दिन के भीतर आवास स्वीकृत कराने का आश्वासन दिया था। हालांकि, काफी समय बीतने के बाद भी आवास स्वीकृत नहीं हुआ और रुपये भी वापस नहीं किए गए।

प्रार्थना पत्र के मुताबिक, 10 अगस्त की सुबह करीब 10:30 बजे पीड़िता के पति ने पूर्व ग्राम प्रधान से रुपये वापस मांगे। आरोप है कि इस पर विवाद हो गया और पूर्व प्रधान ने अपने पुत्रों समेत अन्य लोगों को बुलाकर उसके पति के साथ लाठी-डंडे और लात-मुक्कों से मारपीट की। घटना वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके पति को पानी से भरे गड्ढे में गिराकर डुबोने का भी प्रयास किया गया।
महिला का आरोप है कि पति को बचाने के लिए वह मौके पर पहुंची तो आरोपितों ने उसे भी दौड़ा लिया। घर पहुंचने के बाद आरोपितों द्वारा घर में घुसकर उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप है।

पीड़िता ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि वह सात माह की गर्भवती है और मारपीट के दौरान उसके पेट पर भी चोट पहुंचाई गई, जिसके बाद पेट में तेज दर्द और रक्तस्राव होने लगा।
पीड़िता के मुताबिक, शोर सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव किया। उसने घटना का वीडियो भी मौजूद होने की बात कही है। वहीं, पीड़िता ने आरोप लगाया है कि शिकायत के बाद उस पर तहरीर बदलवाने का दबाव भी बनाया जा रहा है।

पीड़िता ने आरोपितों को प्रभावशाली बताते हुए अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंका जताई है। उसका कहना है कि स्थानीय थाने में सूचना देने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया।
पुलिस अधीक्षक से पीड़िता ने आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई कराने की मांग की है। हालांकि, प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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