हरि सिंह ढिल्लो के चुनाव प्रचार की कमान भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने भी संभाली। दोनों के पारिवारिक संबंधों के चलते चुनाव में चौधरी की सक्रियता को महत्वपूर्ण माना गया। भाजपा ने इस चुनाव में संगठनात्मक ताकत और कार्यकर्ताओं के समन्वय पर जोर दिया।
वहीं, समाजवादी पार्टी ने ढिल्लो के मुकाबले हाजी दानिश अख्तर को मैदान में उतारा था। चुनाव के दौरान दोनों दलों ने अपने-अपने समर्थकों और मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए प्रयास किए।
राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, भाजपा के पक्ष में मतदाताओं का समर्थन जुटाने की रणनीति, संगठन की सक्रियता और मतदान की बेहतर तैयारी ने ढिल्लो की जीत में भूमिका निभाई। हिंदू मतों के ध्रुवीकरण को भी उनकी चुनावी सफलता से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इसके प्रभाव का आकलन आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है।
शिक्षक खंड का यह चुनाव भाजपा और सपा दोनों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा। हरि सिंह ढिल्लो की जीत ने क्षेत्र में भाजपा की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक सक्रियता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।









