कुशीनगर के चरगहा में पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन, विधायक पीएन पाठक ने पहलवानों का बढ़ाया उत्साह
कुशीनगर। आधुनिकता के दौर में जहां पारंपरिक खेलों की पहचान धीरे-धीरे कम होती जा रही है, वहीं कुशीनगर के चरगहा गांव में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता ने देसी खेल संस्कृति की यादें ताजा कर दीं। हाटा विकास खंड के चरगहा में मेले के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस बार भी पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें जिलेभर से पहुंचे पहलवानों ने अपने दमखम और दांव-पेच का शानदार प्रदर्शन किया।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सत्येंद्र पटेल के नेतृत्व में आयोजित प्रतियोगिता में मिट्टी के अखाड़े पर पहलवानों के बीच रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। कहीं पहलवानों ने दमदार पटखनी देकर जीत हासिल की, तो कहीं कड़ी टक्कर के बाद मुकाबला बराबरी पर छूट गया। अखाड़े में मौजूद दर्शकों ने तालियां बजाकर पहलवानों का उत्साह बढ़ाया।
ग्रामीण खेल संस्कृति को बचाने की पहल
चरगहा के मेले में कुश्ती का रोमांच लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। मिट्टी का अखाड़ा, पहलवानों का दमखम और दर्शकों का उत्साह ग्रामीण जीवन की पारंपरिक खेल संस्कृति की झलक पेश कर रहा था। आधुनिक खेलों और मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव के बीच पारंपरिक कुश्ती अपनी पहचान बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।
ऐसे में इस तरह के आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि ग्रामीण खेल परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विधायक पीएन पाठक ने बढ़ाया पहलवानों का उत्साह
प्रतियोगिता में क्षेत्रीय विधायक पीएन पाठक सहित कई राजनीतिक और सामाजिक लोग मौजूद रहे। विधायक पीएन पाठक ने पहलवानों का हाथ मिलवाकर मुकाबलों की शुरुआत कराई और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कुश्ती को भारतीय संस्कृति की धरोहर बताते हुए इसे संरक्षित करने पर जोर दिया।
चरगहा के मेले में आयोजित इस कुश्ती प्रतियोगिता ने एक बार फिर साबित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक खेलों के प्रति लोगों का लगाव आज भी कायम है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जुड़ने और देसी खेलों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।
रिपोर्टर: ज्ञानेश्वर बरनवाल
स्थान: कुशीनगर, उत्तर प्रदेश









