वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने ठोस कार्रवाई की उठाई मांग
लखीमपुर खीरी। जनपद लखीमपुर खीरी में तेंदुए के हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कोतवाली सदर क्षेत्र की महेवागंज चौकी अंतर्गत ग्राम पंचायत शीतलापुर के मजरा टॉपर पुरवा का है। यहां कथित तौर पर एक तेंदुआ आठ वर्षीय मासूम को घर से उठा ले गया। परिजनों ने बच्चे की तलाश की तो उसका अधखाया शव मिलने से परिवार में चीख-पुकार मच गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है।
मृतक की पहचान गांव निवासी विनोद कुमार के आठ वर्षीय बेटे अमित के रूप में बताई जा रही है। मासूम की दर्दनाक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, वहीं ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
तेंदुए की दहशत से सहमे ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में तेंदुए के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में तेंदुए को पकड़ने के लिए न तो पिंजरा लगाया गया और न ही पर्याप्त निगरानी या पकड़ने के लिए टीम तैनात किए जाने की जानकारी है।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों को डर है कि यदि समय रहते तेंदुए को पकड़ने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में कोई और बड़ा हादसा हो सकता है।
मौके पर पहुंची पुलिस, पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
घटना की सूचना मिलने पर महेवागंज चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में आगे की जानकारी संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आखिर कब जागेगा वन विभाग?
मासूम की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ग्रामीणों को तेंदुए के आतंक से कब राहत मिलेगी? क्या वन विभाग किसी और अनहोनी का इंतजार कर रहा है, या फिर अब तेंदुए को पकड़ने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग तत्काल प्रभावी कार्रवाई करे, प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाए और तेंदुए को पकड़ने के लिए आवश्यक इंतजाम करे, ताकि किसी दूसरे परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।
फिलहाल, टॉपर पुरवा में हुई इस दर्दनाक घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। अब देखना होगा कि वन विभाग इस मामले में कितनी जल्दी प्रभावी कदम उठाता है।
संवाददाता: मुनीष वर्मा









