कुशीनगर के खड्डा क्षेत्र में एसडीआरएफ और पुलिस वाहनों के हूटर बजते ही ग्रामीणों के दिलों की धड़कन तेज हो जाती है। लोगों को आशंका रहती है कि कहीं पानी का प्रवाह और तेज होकर गांवों की ओर न बढ़ जाए।
उधर, नेपाल से पानी के साथ बहकर आए इंसानों और जानवरों के शवों, सीवरेज और अन्य दूषित सामग्री ने पूरे क्षेत्र में दुर्गंध पैदा कर दी है। खड्डा के अलावा सेवरही, दुदही और महाराजगंज के निचलौल व शिकारपुर क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात बताए जा रहे हैं।
लगातार बढ़ रही दुर्गंध और दूषित पानी के कारण कई लोगों के बीमार पड़ने की शिकायत सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में हैजा जैसी गंभीर बीमारी फैलने की आशंका भी जताई है।
दूषित पानी का असर खेतों में लगी सब्जियों पर भी पड़ रहा है। खड्डा निवासी वधु कुमार का कहना है कि क्षेत्र में भिंडी की फसल ठीक-ठाक मात्रा में है, लेकिन खेतों में पानी भरने के कारण इसके दूषित होने की आशंका है। इसे खाने वाले कुछ लोगों को पेट दर्द, उल्टी, डायरिया और बुखार की शिकायत हो रही है।
वहीं, पिछले दिनों बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई मछलियों को लोगों ने बड़ी संख्या में पकड़ा था। ग्रामीणों के अनुसार, मछली खाने के बाद भी कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी है। इसके बाद क्षेत्र में मछली खाने पर रोक लगा दी गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से दूषित पानी की निकासी, शवों और अन्य दूषित सामग्री के सुरक्षित निस्तारण तथा स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की जांच कराने की मांग की है।
बाढ़ की मार झेल रहे सीमांत क्षेत्र में अब दूषित पानी, दुर्गंध और बीमारी का खतरा लोगों के लिए नई चिंता बन गया है।









