चार छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था मृतक
कुशीनगर। जिले के विशुनपुरा विकासखंड अंतर्गत त्रिलोकपुर बुजुर्ग गांव निवासी 42 वर्षीय हरेंद्र उर्फ बबलू की दुबई में मौत हो गई। बुधवार को उनका शव गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। पति का शव देखकर पत्नी बदहवास हो गई, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इस हृदयविदारक घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
मिली जानकारी के अनुसार, हरेंद्र उर्फ बबलू परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए विदेश में मजदूरी करने गए थे। परिवार की जिम्मेदारियां उनके ही कंधों पर थीं। वह अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। उनकी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हालांकि, दुबई में उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

चार मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
हरेंद्र अपने पीछे पत्नी और चार छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनकी दो बेटियां प्रीति (8 वर्ष) और रागिनी (7 वर्ष) हैं, जबकि दो बेटे अनुराग (5 वर्ष) और रितेश (3 वर्ष) हैं। अभी इन बच्चों की उम्र पढ़ने-लिखने और पिता के स्नेह में जीवन बिताने की है, लेकिन नियति ने उनसे पिता का साया छीन लिया।
पिता की मौत के बाद इन मासूम बच्चों के भविष्य को लेकर परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जिस पिता के सहारे बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई की उम्मीद थी, अब वह इस दुनिया में नहीं रहे।
परिवार के सामने आर्थिक संकट
हरेंद्र की मौत से परिवार पर आर्थिक संकट भी गहरा गया है। परिवार की आजीविका का एकमात्र सहारा छिन जाने से पत्नी और चार बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा तथा अन्य जरूरी खर्चों को लेकर चिंता बढ़ गई है। परिवार के सामने अब भविष्य की जिम्मेदारियों को निभाने की बड़ी चुनौती है।
विदेश में मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले हरेंद्र की मौत ने उनके परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव में उनके घर पर शोक जताने वालों का तांता लगा हुआ है। हर किसी की आंखें नम हैं और परिवार को इस असहनीय दुख से उबरने के लिए ढांढस बंधाया जा रहा है।
हरेंद्र की मौत ने एक बार फिर विदेश में रोजी-रोटी कमाने गए कामगारों के परिवारों की मुश्किलों को सामने ला दिया है। फिलहाल, उनकी मौत के कारणों और परिवार को मिलने वाली संभावित आर्थिक सहायता के संबंध में विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।









