एपी तटबंध के किमी 13.980 पर किनारे तक पहुंची नदी की धारा, लगातार बोल्डर डालने के बावजूद जारी है कटान; घर, खेत और पुश्तैनी जमीन को लेकर चिंतित हैं ग्रामीण
अहिरौली दान, कुशीनगर। बड़ी गंडक नदी का डिस्चार्ज घटने के बावजूद अहिरौली दान क्षेत्र में कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। एपी तटबंध के किमी 13.200 से 14.500 के बीच किमी 13.980 पर नदी की धारा तटबंध के बिल्कुल किनारे बह रही है। कटान रोकने के लिए लगातार बोल्डर डाले जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीन कटने का सिलसिला जारी है। नदी की बदलती धारा से तटबंध की सुरक्षा और आसपास की आबादी पर खतरा बना हुआ है। कटान की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें अपने घर, खेत और पुश्तैनी जमीन के नदी में समा जाने का डर सता रहा है।
डिस्चार्ज घटने के बाद भी कटान जारी
नदी का जलस्तर और डिस्चार्ज कम होने के बाद भी कटान जारी रहने से ग्रामीणों की परेशानी कम नहीं हो रही है। प्रभावित हिस्से में नदी की धारा तटबंध के किनारे बह रही है, जिससे जमीन लगातार कट रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बड़ी गंडक नदी की धारा तटबंध से काफी दूर बहती थी, लेकिन समय के साथ नदी का रुख बदलता गया। अब स्थिति यह है कि कई स्थानों पर नदी की धारा तटबंध के बिल्कुल करीब पहुंच गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, कटान का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो आसपास की कृषि भूमि के साथ रिहायशी इलाकों पर भी संकट गहरा सकता है। लोगों को आशंका है कि नदी की धारा का रुख नहीं बदला और कटान पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो उन्हें अपनी जमीन और घर बचाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
लगातार बोल्डर डालने के बावजूद नहीं मिल रही राहत
कटान प्रभावित हिस्से को सुरक्षित करने के लिए बाढ़ खंड की ओर से बचाव कार्य कराए जा रहे हैं। नदी के किनारे बोल्डर डाले जा रहे हैं, ताकि पानी के सीधे दबाव से जमीन को बचाया जा सके। इसके बावजूद किमी 13.980 के आसपास कटान जारी है। ऐसे में बचाव कार्यों के बीच भी नदी की धारा तटबंध के लिए चुनौती बनी हुई है।
स्थानीय स्तर पर कटान की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि नदी का पानी घटने के बाद भी जब जमीन कट रही है, तो आने वाले दिनों में स्थिति क्या होगी, इसे लेकर वे आशंकित हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रभावित हिस्से में बचाव कार्यों को प्रभावी बनाया जाए, ताकि उनकी जमीन और आबादी को सुरक्षित रखा जा सके।
डिस्चार्ज कम होने पर भी क्यों जारी रहता है कटान?
इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ दीप रतन सिंह ने बताया कि नदी का डिस्चार्ज यानी किसी निश्चित समय में बहने वाले पानी की कुल मात्रा और किसी विशेष स्थान पर धारा का वेग अलग-अलग बातें हैं। डिस्चार्ज घटने के बावजूद यदि नदी की धारा किसी स्थान पर सिमटकर तटबंध के किनारे बहने लगती है, तो वहां पानी का स्थानीय वेग और दबाव बढ़ सकता है। इससे किनारे की मिट्टी का कटाव जारी रह सकता है।
उन्होंने बताया कि नदी की धारा का रुख, तलहटी की बनावट और किनारे की मिट्टी की प्रकृति भी कटान को प्रभावित करती है। बाढ़ के दौरान पानी के लगातार दबाव से कमजोर हुई मिट्टी जलस्तर घटने के बाद भी ढह सकती है। इसके अलावा, नदी की धारा में होने वाले बदलाव और किनारे पर पानी के प्रभाव के कारण भी कटान की स्थिति बनी रह सकती है।
एसडीओ के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में नदी का डिस्चार्ज कम होने के बाद भी कटान रुकना जरूरी नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में कटान रोकने के लिए विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
घर और पुश्तैनी जमीन बचाने की चिंता
बड़ी गंडक नदी के लगातार कटान से प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। किसानों के लिए उनकी जमीन आजीविका का प्रमुख साधन है, वहीं कई परिवारों के लिए पुश्तैनी जमीन और मकान उनकी वर्षों की मेहनत और जीवनभर की कमाई से जुड़े हैं। ऐसे में नदी की धारा का तटबंध के करीब पहुंचना उनके लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों की निगाहें अब कटान रोकने के लिए चलाए जा रहे बचाव कार्यों पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों से नदी की धारा के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित किया जा सकेगा।
फिलहाल, डिस्चार्ज घटने के बावजूद एपी तटबंध के किमी 13.980 पर जारी कटान ने एक बार फिर नदी की बदलती धारा से पैदा होने वाली चुनौती को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि बाढ़ खंड के बचाव कार्य कटान पर कितना प्रभावी नियंत्रण कर पाते हैं और तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों को कब तक राहत मिल पाती है।









