जन्माष्टमी को लेकर जिले में बढ़ी रौनक, 91 स्थानों पर सजेगा डोल; कस्बों में निकलेगा जुलूस

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कुशीनगर। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर जिले में तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रतोत्सव शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग एक ही दिन मिलने के कारण गृहस्थ और वैष्णव दोनों शुक्रवार को ही जन्माष्टमी का व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। पर्व को लेकर मंदिरों, धार्मिक स्थलों, कस्बों और प्रमुख बाजारों में विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिले में 91 स्थानों पर डोल रखा जाएगा, जबकि विभिन्न कस्बों और प्रमुख बाजारों में डोल जुलूस भी निकाले जाएंगे। इसे देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का संयोग

महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के संस्थापक ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुक्रवार को रात्रि 11.13 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र पूरे दिन रहेगा और रात्रि 11.12 बजे तक इसका संयोग रहेगा। ऐसे में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग शुक्रवार को ही मिलने से गृहस्थ और वैष्णव दोनों इसी दिन जन्माष्टमी का व्रत एवं जन्मोत्सव मनाएंगे।

उन्होंने बताया कि श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखकर शाम को भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाएंगे। बाल स्वरूप में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को पालने में विराजमान किया जाएगा। मध्यरात्रि से पहले गौरी-गणेश और वरुण का आवाहन एवं पूजन किया जाएगा। इसके बाद मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ विधिवत पूजन, स्तुति और आरती की जाएगी। श्रद्धालुओं से रात्रि जागरण कर भगवान की भक्ति में लीन रहने की भी परंपरा है।

बाजारों में बढ़ी चहल-पहल

जन्माष्टमी को लेकर बुधवार से ही जिले के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं से लेकर बाल गोपाल की पोशाक, मुकुट, बांसुरी, झूले और पूजा सामग्री की दुकानों पर खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ पहुंच रही है। घरों और मंदिरों में झांकियां सजाने के लिए भी लोग आवश्यक सामान खरीद रहे हैं।

कई स्थानों पर आकर्षक झांकियां तैयार की जा रही हैं। कहीं भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को पालने में सजाने की तैयारी है तो कहीं गोकुल, मथुरा और वृंदावन की झांकी तैयार की जा रही है। मंदिर समितियों की ओर से विशेष सजावट, विद्युत झालरों और फूलों से मंदिरों को सजाने की तैयारी की जा रही है।

दिनभर व्रत, रात में जन्मोत्सव

जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान आदि के बाद भगवान श्रीकृष्ण का पूजन-अर्चन कर व्रत का संकल्प लेंगे। इसके बाद दिनभर भजन-कीर्तन, श्रीकृष्ण कथा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। शाम होते ही घरों और मंदिरों में जन्मोत्सव की तैयारियां तेज हो जाएंगी।

रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा। मध्यरात्रि में शंख और घंटियों की गूंज के बीच भगवान के बाल स्वरूप का पूजन होगा। इसके बाद आरती और भजन-कीर्तन किए जाएंगे। श्रद्धालु भगवान को प्रसाद अर्पित करने के बाद स्वयं प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करेंगे। जिले के कई मंदिरों में मध्यरात्रि के बाद भी विशेष आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।

91 स्थानों पर रखा जाएगा डोल

जिले में जन्माष्टमी के अवसर पर 91 स्थानों पर डोल रखने की तैयारी की गई है। विभिन्न कस्बों और प्रमुख बाजारों में डोल जुलूस निकालने की भी परंपरा है। इसके लिए आयोजक समितियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। डोल को आकर्षक ढंग से सजाने के साथ ही जुलूस के मार्ग और श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

पडरौना कोतवाली, तुर्कपट्टी, जटहा बाजार, रविंद्रनगर धूस, रामकोला, खड्डा, पटहेरवा, तरयासुजान और कसया थाना क्षेत्रों में कुल 91 स्थानों पर डोल रखा जाएगा।

जुलूस को लेकर सुरक्षा व्यवस्था

जन्माष्टमी के दौरान प्रमुख मंदिरों और डोल जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। जुलूस के निर्धारित मार्गों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था पर भी नजर रखी जाएगी।

प्रशासन की ओर से आयोजक समितियों से निर्धारित नियमों का पालन करने और जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से निकालने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जन्माष्टमी का पर्व आपसी सौहार्द और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।

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