जलस्तर घटा, लेकिन बढ़ा कटान का खतरा; भेड़ियारी का अंत्येष्टि स्थल नदी की जद में

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खड्डा (कुशीनगर)। गंडक (नारायणी) नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है, लेकिन इसके साथ ही तटवर्ती क्षेत्रों में कटान का खतरा बढ़ गया है। मंगलवार को भी नदी के जलस्तर में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। हालांकि वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा में कमी दर्ज की गई है, फिर भी नदी का तेज बहाव छितौनी तटबंध और हाल ही में बनाए गए स्परों पर लगातार दबाव बना रहा है।

बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार सोमवार और मंगलवार को नदी के डिस्चार्ज में कमी आई है, लेकिन जलस्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है। ऐसे में नदी का रुख तटबंधों और संवेदनशील स्थानों की ओर होने से कटान की समस्या गंभीर होती जा रही है।

सबसे अधिक चिंता भेड़ियारी क्षेत्र में ठोकर संख्या-3 के पास हो रही तेज कटान को लेकर है। यहां स्थित विश्रामगृह और अंत्येष्टि स्थल अब नदी की जद में आ गए हैं। कटान लगातार इन स्थलों की ओर बढ़ रही है और नदी का किनारा खतरनाक रूप से नजदीक पहुंच चुका है। स्थिति यह है कि अंत्येष्टि स्थल के पास तक नदी पहुंच जाने के कारण अब शवों का अंतिम संस्कार निर्धारित स्थल के बजाय खुले स्थान पर करना पड़ रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का रुख नहीं बदला और कटान की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो विश्रामगृह और अंत्येष्टि स्थल कभी भी नदी में समाहित हो सकते हैं। इससे आसपास के गांवों के लोगों में भय और चिंता का माहौल है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और बाढ़ खंड विभाग से तत्काल प्रभावी कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है, ताकि महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों को बचाया जा सके। लोगों का कहना है कि जलस्तर भले ही घट रहा हो, लेकिन नदी की धार अब भी बेहद खतरनाक बनी हुई है और कटान का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

नर्सिंग, मनोहर,दिवाकर,शंभू शीत दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि पानी तो घट रहा है, लेकिन नदी किनारे की जमीन तेजी से काट रही है। अंत्येष्टि स्थल तक कटान पहुंच गई है। अगर जल्द बचाव कार्य नहीं हुआ तो यह जगह भी नदी में समा जाएगी और गांव के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।”

 

जिला प्रभारी – जितेंदर सिंह 

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