कुशीनगर। जनपद कसया के एक निजी अस्पताल में दो जून को इलाज के दौरान हुई महिला की मौत के मामले में अब आयुष्मान योजना से जुड़ा बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। आरोप है कि मृतका नरगिस खातून के नाम से फर्जी आयुष्मान कार्ड तैयार कर निजी अस्पताल में इलाज और योजना के तहत भुगतान की प्रक्रिया की गई। मामले की शिकायत के बाद अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (एडी हेल्थ) गोरखपुर ने जांच कराई तो मृतका के नाम से जारी आयुष्मान कार्ड पर पश्चिमी चंपारण बिहार का पता दर्ज मिला। वहीं मृतका के पति ने जांच के दौरान स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी कभी आयुष्मान योजना की लाभार्थी नहीं रही थीं और कार्ड में दर्ज अन्य व्यक्तियों से उनका कोई संबंध नहीं था।
एडी हेल्थ की जांच में प्रथम दृष्टया सामने आए तथ्यों के आधार पर सीएमओ को मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। एडी हेल्थ ने सीएमओ को भेजे पत्र की प्रति जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी भेजी है। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग के साथ ही आयुष्मान योजना से जुड़े जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावना है।
दो जून को निजी अस्पताल में हुई थी महिला की मौत
कसया थाना क्षेत्र के अंबेडकर नगर (भरौली) निवासी मो. तसनीम कौसर की पत्नी नरगिस खातून का दो जून को कसया के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। महिला की मौत के बाद परिजनों ने इलाज और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते हुए शिकायत की थी। मृतका के पति ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी के नाम से आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल किया गया, जबकि वह योजना की लाभार्थी ही नहीं थीं। मामले की शिकायत के बाद सीएमओ स्तर से जांच समिति गठित की गई। समिति ने 16 जून को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और इसके बाद 18 जून को सीएमओ की ओर से अपर निदेशक को जांच आख्या भेजी गई। हालांकि एडी हेल्थ की जांच में सीएमओ स्तर की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी किए जाने की बात सामने आई।
मृतका के नाम पर कार्ड पता पश्चिमी चंपारण का
एडी हेल्थ की जांच में मृतका नरगिस खातून के नाम से आयुष्मान कार्ड जारी होना सामने आया। इस कार्ड पर पश्चिमी चंपारण, बिहार का पता दर्ज है। कार्ड से संबंधित फैमिली आईडी 102030101721664500001163 बताई गई है। मृतका के पति तसनीम कौसर ने जांच के दौरान कहा कि उनकी पत्नी कभी आयुष्मान योजना की लाभार्थी नहीं रही थीं। साथ ही आयुष्मान कार्ड में दर्ज परिवार के अन्य सदस्यों से भी उनकी पत्नी का कोई संबंध नहीं था। ऐसे में सवाल खड़ा हुआ कि मृतका के नाम पर यह कार्ड किस आधार पर तैयार हुआ और निजी अस्पताल में इलाज के लिए इसका इस्तेमाल कैसे किया गया।
आधार और मोबाइल नंबर के इस्तेमाल पर भी सवाल
शिकायतकर्ता की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि उनकी अनुपस्थिति में उनकी पत्नी का आधार कार्ड और मोबाइल नंबर लेकर अस्पताल में पंजीकरण किया गया। इसके बाद आयुष्मान भारत योजना के तहत भी पंजीकरण और क्लेम की प्रक्रिया किए जाने की बात सामने आई। एडी हेल्थ की जांच समिति ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल की। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मृतका के नाम से जारी आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल निजी अस्पताल में इलाज के लिए किया गया था। इसी आधार पर मामले में फर्जीवाड़े की आशंका को गंभीर मानते हुए आगे की जांच और विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमओ स्तर की जांच में आरोपों की नहीं हुई थी पड़ताल
एडी हेल्थ ने अपनी जांच रिपोर्ट में सीएमओ स्तर से गठित जांच समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 16 जून को जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट दी और 18 जून को सीएमओ ने अपर निदेशक को जांच आख्या भेजी। इसमें मृतका का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत होना बताया गया था। जांच आख्या में मरीज और सर्जन की गूगल फोटो सहित अन्य साक्ष्य लगाए गए थे लेकिन शिकायतकर्ता की ओर से आयुष्मान कार्ड को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों की पर्याप्त पड़ताल नहीं किए जाने पर एडी हेल्थ ने सवाल उठाया। एडी हेल्थ ने पूछा कि आखिर किन कारणों से जांच के दौरान इन महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया।
जांच के आधार पर फर्जी कार्ड से भुगतान की आशंका
एडी हेल्थ ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया माना है कि मृतका नरगिस खातून के नाम से संदिग्ध आयुष्मान कार्ड बनाकर उसके आधार पर अस्पताल में इलाज और भुगतान की प्रक्रिया अपनाई गई हो सकती है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर अनियमितता के साथ-साथ जालसाजी और सरकारी योजना के दुरुपयोग का मामला बन सकता है।
एडी हेल्थ ने सीएमओ को निर्देश दिया है कि संदिग्ध आयुष्मान कार्ड जारी किए जाने, उसके इस्तेमाल तथा अस्पताल को किए गए भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए और एक सप्ताह के भीतर दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
विभागीय जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मृतका आयुष्मान योजना की वास्तविक लाभार्थी नहीं थीं तो उनके नाम से कार्ड कैसे तैयार हुआ? कार्ड में पश्चिमी चंपारण, बिहार का पता किस आधार पर दर्ज हुआ और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी पहचान कैसे सत्यापित की गई? इसके अलावा आधार और मोबाइल नंबर के आधार पर पंजीकरण तथा क्लेम की प्रक्रिया किस स्तर पर पूरी हुई, इसकी भी जांच जरूरी है। एडी हेल्थ की ओर से मामले को गंभीरता से लिए जाने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ आयुष्मान योजना से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। जांच में अस्पताल द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, आयुष्मान पोर्टल पर दर्ज विवरण, लाभार्थी का सत्यापन, इलाज से संबंधित रिकॉर्ड और भुगतान की प्रक्रिया को शामिल किया जा सकता है।
रिपोर्ट मिलते ही निजी अस्पताल पर कार्रवाई की जाएगी
उक्त सम्बन्ध में सीएमओ डॉ. चंद्र प्रकाश ने बताया कि एडी हेल्थ कार्यालय को मृतका के नाम से जारी आयुष्मान कार्ड संदिग्ध होने की जानकारी दी गई थी। कसया के निजी अस्पताल को हुए भुगतान के संबंध में प्रदेश स्तर पर आयुष्मान कार्ड के मामलों का संचालन करने वाली संस्था से जांच कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद निजी अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार निजी अस्पताल के पूरे ग्रुप के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है। विभागीय स्तर पर मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
कई सवालों के जवाब जांच से होंगे साफ
महिला की मौत के मामले में अब सिर्फ इलाज की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि आयुष्मान कार्ड के इस्तेमाल को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के नाम से कार्ड जारी होने, उसमें दूसरे जिले का पता दर्ज होने, निजी अस्पताल में कार्ड के इस्तेमाल और योजना के तहत भुगतान की प्रक्रिया की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
साजिद अंसारी पड़रौना









