ईरान का कुवैत में बड़ा मिसाइल हमला, चीनी कंपनी की बिल्डिंग तबाह, एक कर्मचारी की मौत

ईरान का कुवैत में मिसाइल हमला, चीनी फर्म तबाह

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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने खुद उसके अपने करीबी साझेदार चीन को हैरान कर दिया है। गुरुवार सुबह ईरान की तरफ से कुवैत में दागी गई मिसाइलों ने उत्तरी कुवैत में स्थित एक चीनी कंपनी की इमारत को सीधा निशाना बना डाला। कुवैती सेना के मुताबिक इस हमले में बिल्डिंग को भारी नुकसान पहुंचा है और वहां काम कर रहे एक कर्मचारी की मौके पर ही मौत हो गई।

गौर करने वाली बात यह है कि यह हमला उस घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद हुआ, जब जॉर्डन के एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की तरफ से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया था। यानी ईरान की मिसाइलें एक साथ कई दिशाओं में दागी गई थीं, और उनमें से कुछ का असर अनपेक्षित जगहों पर भी हुआ।

अमेरिका का भी बड़ा जवाबी हमला

इसी बीच अमेरिकी सेना की तरफ से भी एक अहम बयान सामने आया। अमेरिका ने कहा कि उसने ईरान के खिलाफ हमलों का एक बड़ा चरण पूरा कर लिया है। यह कार्रवाई जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान द्वारा पहले किए गए मिसाइल हमले के जवाब में की गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्रवाई में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें मिलिट्री कमांड सेंटर, मिसाइल-ड्रोन फैसिलिटी और तटीय सुरक्षा प्रतिष्ठान शामिल थे।

राहत की बात यह रही कि जॉर्डन की सरकारी न्यूज एजेंसी ‘पेट्रा’ ने साफ किया कि जॉर्डन ने जिन मिसाइलों को हवा में रोका, उनसे किसी तरह की जान-माल की हानि नहीं हुई।

ईरान-चीन के रिश्तों पर क्या पड़ेगा असर?

अब तक जारी इस पूरे संघर्ष के दौरान चीन और ईरान के बीच रिश्ते काफी संतुलित नजर आए हैं। चीन ने कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका और इजराइल की कार्रवाइयों की खुलकर आलोचना की, ईरान की संप्रभुता के समर्थन में बयान दिए और युद्धविराम की अपील भी की। पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन ने शांति प्रस्ताव भी आगे बढ़ाए और ईरान को संघर्ष रोकने के लिए मनाने की कोशिश की।

चीन ने पूरे प्रकरण में खुद को एक शांतिदूत के तौर पर पेश किया, जबकि अमेरिका पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया। साथ ही खाड़ी के देशों के साथ अपने बड़े आर्थिक हितों को देखते हुए चीन ने वहां भी संतुलन बनाए रखने की नीति अपनाई।

लेकिन अब कुवैत में सीधे तौर पर एक चीनी कंपनी की इमारत का ईरानी हमले में तबाह होना, इन दोनों देशों के बीच अब तक बने भरोसे को हिला सकता है। यह घटना दोनों देशों के रिश्तों में एक नया मोड़ ला सकती है।

चीन दे रहा था ईरान को हथियारों की मदद

रक्षा जरूरतों के मामले में चीन लगातार ईरान की मदद करता आया है। एक रिपोर्ट के हवाले से यह भी सामने आया है कि चीन जल्द ही कंधे से दागी जाने वाली एयर-डिफेंस मिसाइल लॉन्चर की पहली खेप तेहरान भेजने की तैयारी में था। बताया जा रहा है कि कुल मिलाकर चीन करीब 400 मिसाइलों की सप्लाई ईरान को करने वाला था। ऐसे नाजुक वक्त में ही कुवैत में चीनी फर्म पर हुआ यह हमला दोनों देशों के बीच नई हलचल पैदा कर सकता है।

फिलहाल पूरे मिडिल ईस्ट में स्थिति तेजी से बदल रही है और आने वाले दिनों में इस पर और अपडेट सामने आ सकते हैं।

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