त्योहारी सीजन नजदीक है और इस बीच रसोई का बजट लगातार डगमगा रहा है। पहले चीनी की कीमतों ने आम आदमी को परेशान किया, अब प्याज ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। बीते कुछ दिनों में प्याज के दाम में जो उछाल आया है, उसने घर के किचन बजट को पूरी तरह हिला दिया है।
दिल्ली-NCR से लेकर नासिक तक असर
रिटेल मार्केट में एक किलो प्याज अब 60 से 65 रुपये के बीच बिक रही है, जबकि कुछ ही समय पहले यही प्याज 30-35 रुपये किलो में मिल रही थी। यानी दाम करीब-करीब दोगुने हो चुके हैं। सिर्फ दिल्ली-NCR ही नहीं, बल्कि नासिक और चेन्नई जैसे शहरों में भी लोगों को प्याज खरीदने के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।
आंकड़ों में कितनी बढ़ी महंगाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मामलों के विभाग ने प्याज का औसत रिटेल भाव करीब 42 रुपये प्रति किलो दर्ज किया है, जो एक महीने पहले के मुकाबले लगभग 19-20 प्रतिशत ज्यादा है। नासिक में हालात और भी गंभीर हैं, जहां महीनेभर के भीतर प्याज के दाम में 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
सरकार बफर स्टॉक से देगी राहत
दामों में अचानक आई इस तेजी को थामने के लिए सरकार ने अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। जिन शहरों में सप्लाई की कमी के चलते कीमतें बेकाबू हुई हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर प्याज पहुंचाई जाएगी, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
चीनी पहले ही बिगाड़ चुकी है बजट
प्याज से पहले चीनी की कीमतों ने रसोई का हिसाब-किताब गड़बड़ा दिया था। पिछले कुछ दिनों में चीनी का रिटेल भाव 65 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक तक पहुंच गया, यानी एक महीने में करीब 15 प्रतिशत का उछाल। इस मुद्दे पर सियासी माहौल भी गरमाया हुआ है — विपक्ष का आरोप है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल से चीनी की सप्लाई प्रभावित हुई है, जबकि केंद्र सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि बाजार में चीनी की कोई कमी नहीं है और इथेनॉल इसकी वजह नहीं है।
आगे क्या उम्मीद करें
फिलहाल त्योहारी सीजन से ठीक पहले दोहरी महंगाई की यह मार आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार के बफर स्टॉक हस्तक्षेप के बाद अगले कुछ दिनों में दामों में नरमी आने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि जब तक सप्लाई सामान्य नहीं होती, राहत मिलने में थोड़ा वक्त लग सकता है।









