जंतर-मंतर पर आरक्षण प्रदर्शन को लेकर बवाल, RAF ने कई लोगों को हिरासत में लिया

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को UGC के इक्विटी नियमों और जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ जुटे प्रदर्शनकारियों को पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने धरना स्थल से हटाया। कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। प्रदर्शनकारी आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और सरकारी योजनाओं में आर्थिक आधार को अधिक महत्व देने की मांग कर रहे थे।

जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारी

21 अगस्त को बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मौजूदा जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा से जुड़ी थी। इसके अलावा UGC के कुछ नियमों और SC-ST से संबंधित प्रावधानों को लेकर भी अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की गई।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए, जिन्हें आर्थिक रूप से इसकी वास्तविक जरूरत है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई।

पुलिस और RAF ने संभाला मोर्चा

प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई। जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ाई गई और बैरिकेड लगाए गए। इसके बाद पुलिस और RAF ने प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल से हटाना शुरू किया।

पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर मौके से हटाया गया। कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का दावा था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखने के लिए जुटे थे।

प्रदर्शन की अनुमति को लेकर क्या था विवाद?

इस पूरे घटनाक्रम में प्रदर्शन की अनुमति का मुद्दा भी अहम रहा। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से एक दिन पहले कहा था कि 21 अगस्त को आरक्षण सुधार के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई है

पुलिस ने सोशल मीडिया पर अनुमति मिलने से संबंधित कुछ दावों को भी गलत और भ्रामक बताया था। इसके बावजूद शुक्रवार को प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंच गए। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।

नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू

दिल्ली पुलिस के मुताबिक नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 163 पहले से लागू थी। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के जुलूस, प्रदर्शन और सभा पर रोक थी।

पुलिस ने लोगों से अपील की थी कि प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और उसे आगे साझा करने से बचें। पुलिस ने फर्जी सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।

क्रीमी लेयर की मांग भी उठी

प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर का प्रावधान लागू करने की मांग की। इसके साथ ही SC, ST और OBC से जुड़ी नीतियों में बदलाव की बात भी सामने आई।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी सहायता से वंचित करना नहीं है। उनका तर्क था कि छात्रवृत्ति, फीस में सहायता और कोचिंग जैसी सुविधाओं को आर्थिक जरूरत के आधार पर अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

हिरासत के बाद क्या हुआ?

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को हटाने और कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। पुलिस और RAF की मौजूदगी में प्रदर्शन स्थल को खाली कराया गया।

वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते थे। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए।

फिलहाल जंतर-मंतर पर हुआ यह घटनाक्रम UGC नियमों, आरक्षण व्यवस्था और आर्थिक आधार पर सरकारी सहायता जैसे मुद्दों को लेकर जारी बहस को एक बार फिर सामने ले आया है। आने वाले दिनों में प्रदर्शन से जुड़े संगठनों की अगली रणनीति और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

जंतर-मंतर विवाद पर राहुल गांधी का एक्शन, DCP ऑफिस पहुंचकर ली जांच की जानकारी

और पढ़ें

[the_ad id="164"]