कुशीनगर। पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, निजीकरण पर रोक और वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर अटेवा पेंशन बचाओ मंच कुशीनगर के बैनर तले शुक्रवार को पेंशन तिरंगा यात्रा निकाली गई। प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के आह्वान पर जिलाध्यक्ष अजय कुमार के नेतृत्व में निकाली गई यात्रा में बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यात्रा के समापन के बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार पडरौना को सौंपा गया। पेंशन तिरंगा यात्रा गोस्वामी तुलसीदास इंटरमीडिएट कॉलेज पडरौना से शुरू होकर डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क, कठकुइयां मोड़ तक पहुंची। यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली और निजीकरण के विरोध में आवाज बुलंद की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव रहे।
पुरानी पेंशन को बताया सामाजिक सुरक्षा का आधार
यात्रा से पूर्व आयोजित सभा को संबोधित करते हुए अटेवा जिलाध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक जनवरी 2004 और उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अप्रैल 2005 से शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बंद कर दी। उन्होंने कहा कि अर्धसैनिक बलों के लिए भी पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त की गई है। उनके अनुसार पुरानी पेंशन शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों और अर्धसैनिक बलों का अधिकार है, जो सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि देश में सरकारी संस्थानों के निजीकरण से आने वाली पीढ़ियों के लिए सरकारी रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। अटेवा निजीकरण समाप्त करने के साथ ही शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों और अर्धसैनिक बलों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखेगा।
‘एक व्यवस्था सभी के लिए लागू हो’
मुख्य अतिथि राजीव यादव ने कहा कि सैनिकों के लिए वन रैंक-वन पेंशन, कर्मचारियों के लिए अलग-अलग पेंशन व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली पेंशन को लेकर समाज में असमानता का भाव पैदा होता है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था को पूर्व की तरह बहाल करने की मांग की। अटेवा जिला महामंत्री सुनील पाल ने कहा कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करने से प्रदेश के बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। सरकार को इस मामले पर गंभीरता से विचार करते हुए सकारात्मक पहल करनी चाहिए। जिला कोषाध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि शिक्षक और कर्मचारी एनपीएस या यूपीएस को स्वीकार नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था को पूरी तरह बहाल किया जाए। उन्होंने बताया कि मांगों को लेकर आगामी 25 सितंबर को लखनऊ में विशाल रैली भी प्रस्तावित है।
अर्धसैनिक बलों की पेंशन का भी उठाया मुद्दा
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि अर्धसैनिक बल देश की सीमाओं पर कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं और देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करते हैं। ऐसे जवानों की पेंशन बंद करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने सरकार से सबसे पहले अर्धसैनिक बलों की पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की। सभा को जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री धर्मप्रकाश पाठक, टीएससीटी के प्रांतीय उपाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा, जिलाध्यक्ष अखिलेश यादव, यूटा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुशवाहा, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अविनाश शुक्ला, महामंत्री दिलीप पांडेय समेत अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
कई कर्मचारी संगठनों ने दिया समर्थन
कार्यक्रम को स्वास्थ्य विभाग, लेखपाल संघ, नर्सेज संघ, सफाई कर्मचारी संघ, मदरसा संघ समेत विभिन्न विभागों के कर्मचारियों का समर्थन मिला। यात्रा में अटेवा के पदाधिकारी असगर अली, विनोद कुमार, विनय यादव, भानुप्रताप, विजय प्रताप सिंह, राजमन यादव, वीरेंद्र राजभर, नंदलाल पाल, दिनेश कुशवाहा, सिद्धार्थ यादव, अनुराग पटेल, संजय सिंह, पंकज यादव, ओमपाल सिंह, सूबेदार निगम, रवि प्रकाश, यशपाल, अर्जुन राम, विजय, प्रेमचंद, नन्हेलाल, मुकेश बैरागी, धर्मेंद्र कुशवाहा, धर्मेंद्र सिंह, सतेंद्र कुमार, रत्नेश, धनंजय तालुकदार, राजीव उपाध्याय, विजय चंद, सूर्यकांत, प्रमोद मौर्य, दिनेश यादव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे।
साजिद अंसारी पड़रौना









