कुशीनगर। बाल एवं किशोर श्रम पर प्रभावी रोक लगाने के लिए श्रम विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने गुरुवार को कप्तानगंज और रामकोला क्षेत्र में सघन अभियान चलाया। अभियान के दौरान विभिन्न होटलों, वस्त्रालयों, ढाबों, मोबाइल एवं ऑटो वर्कशॉप सहित कुल 11 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान 15 किशोर श्रमिक चिन्हित किए गए।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी अलंकृता उपाध्याय ने बताया कि संयुक्त टीम द्वारा संबंधित सेवायोजकों और प्रतिष्ठान स्वामियों के विरुद्ध बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 में संशोधन के बाद लागू प्रावधानों के तहत निरीक्षण टिप्पणी जारी करते हुए आवश्यक विधिक कार्रवाई की गई है। अभियान के दौरान प्रतिष्ठान संचालकों को बाल श्रम से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध है। प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने, सुरक्षित वातावरण में रहने और सम्मानजनक बचपन जीने का अधिकार है। प्रतिष्ठान स्वामियों से बच्चों को काम पर लगाने के बजाय उन्हें विद्यालय भेजने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहयोग करने की अपील की गई।
छह माह से दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान
श्रम विभाग के अनुसार प्रतिबंधित परिस्थितियों में बाल श्रम कराते पाए जाने पर संबंधित नियोक्ता या सेवायोजक के खिलाफ छह माह से दो वर्ष तक के कारावास तथा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। विभाग ने सभी प्रतिष्ठान स्वामियों को चेतावनी दी कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों से श्रम न कराया जाए।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम भी रही शामिल
अभियान में श्रम प्रवर्तन अधिकारी अलंकृता उपाध्याय, प्रभारी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग जितेन्द्र टंडन, पंकज कुमार सिंह, अभिषेक कुमार श्रीवास्तव सहित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग पुलिस टीम के सदस्य शामिल रहे। टीम ने प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करने के साथ संचालकों को बाल श्रम कानून के प्रावधानों के प्रति जागरूक भी किया। श्रम विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी प्रतिष्ठान या अन्य स्थान पर बाल श्रम होता दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें। समय पर सूचना मिलने से बच्चों को श्रम से मुक्त कराकर उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और सुरक्षित बचपन का अधिकार दिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।
साजिद अंसारी पड़रौना









