कुशीनगर। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में बड़ी गंडक नदी का जलस्तर घटने के बाद नरवा जोत-एपी तटबंध पर बैक रोलिंग से संभावित कटान को रोकने के लिए बाढ़ बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। तटबंध की सुरक्षा को लेकर शासन ने करीब 32.71 करोड़ रुपये की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। हालांकि करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे इन कार्यों में पारदर्शिता को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थलों पर परियोजना से संबंधित आवश्यक सूचना बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। इसके कारण स्थानीय लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि संबंधित कार्य की स्वीकृत लागत कितनी है, कार्यदायी संस्था कौन है, परियोजना कब स्वीकृत हुई और इसे कब तक पूरा किया जाना है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सूचना बोर्ड लगाया जाना अनिवार्य होना चाहिए।
जानकारी के अनुसार बड़ी गंडक नदी का तेज बहाव हर वर्ष लगभग 17 किलोमीटर लंबे पिपराघाट-अहिरौली दान एपी तटबंध के विभिन्न हिस्सों पर दबाव और कटान की स्थिति उत्पन्न करता है। बरसात के बाद जब नदी का जलस्तर घटता है, तब धारा में बदलाव और बैक रोलिंग के कारण तटबंध के कई हिस्से अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। इसी खतरे को देखते हुए विभागीय अभियंताओं की निगरानी में सुरक्षा कार्य कराए जा रहे हैं।
नरवा जोत क्षेत्र के किमी 1.700 नोज भाग में ट्रांजिट एप्रन और अप एवं डाउन स्ट्रीम में स्लोप पिचिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। वर्तमान में ठोकर के शीर्ष भाग पर ब्रिक सोलिंग का कार्य कराया जा रहा है। वहीं जवही दयाल के चैनपट्टी क्षेत्र में भी बाढ़ सुरक्षा से जुड़े निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो निर्माण स्थल पर कार्य का पूरा विवरण प्रदर्शित किया जाना चाहिए। इससे आम नागरिकों को परियोजना की जानकारी मिलने के साथ-साथ कार्य की गुणवत्ता और प्रगति पर नजर रखने में भी सुविधा होगी। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि निर्माण स्थलों पर तत्काल सूचना बोर्ड लगाए जाएं तथा तीनों परियोजनाओं की लागत, समय-सीमा और कार्यदायी संस्था सहित सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं।
ग्रामीणों का मानना है कि पारदर्शिता बढ़ने से न केवल जनता का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सकेगी। फिलहाल बाढ़ सुरक्षा कार्य जारी हैं, लेकिन सूचना बोर्डों की अनुपस्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
प्रेम सिंह – कुशीनगर









