पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि “PoK एक अलग देश है, उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। अगर वहां चुनाव हो रहे हैं तो भारत को उस पर आपत्ति नहीं करनी चाहिए।” बयान सामने आते ही भाजपा ने इसे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताते हुए तीखा हमला बोला।
क्या कहा NC सांसद ने?
मीडिया से बातचीत के दौरान रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत के प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं है, इसलिए वहां होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर भारत को प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना था कि दोनों देशों को अपने-अपने क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए और विवाद को बातचीत से सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
भाजपा ने किया पलटवार
भाजपा नेताओं ने इस बयान को भारत की संप्रभुता के खिलाफ बताते हुए कहा कि संसद में बैठे किसी जनप्रतिनिधि से ऐसी टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जा सकती। पार्टी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाला हिस्सा भी शामिल है, भारत का अभिन्न अंग है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
भाजपा ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान पाकिस्तान के उस नैरेटिव को मजबूती देते हैं, जिसे भारत लगातार खारिज करता आया है।
भारत का आधिकारिक रुख क्या है?
भारत सरकार का स्पष्ट और लगातार दोहराया गया रुख है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा है। विदेश मंत्रालय कई बार कह चुका है कि पाकिस्तान द्वारा वहां कराए जाने वाले चुनाव या प्रशासनिक गतिविधियां अवैध हैं और उनसे कब्जे को कोई वैधता नहीं मिलती।
हाल ही में विदेश मंत्रालय ने PoK में चुनावों को लेकर पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा था कि लोकतंत्र का दिखावा करने के बजाय उसे अवैध कब्जा समाप्त करना चाहिए।
सियासी बयानबाजी तेज
NC सांसद के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई। भाजपा समर्थकों ने इसे राष्ट्रहित के खिलाफ बताया, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि बयान को उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर और PoK का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है और ऐसे बयान चुनावी माहौल में राजनीतिक विवाद को और बढ़ा सकते हैं।
क्यों अहम है यह विवाद?
PoK में हाल ही में चुनावी गतिविधियों और वहां की सुरक्षा स्थिति को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी तेज हुई है। ऐसे समय में किसी भारतीय सांसद का अलग रुख सामने आना राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









