तिरंगा यात्रा के बाद 80 छात्राएं हुईं बीमार, अस्पताल में मची अफरा-तफरी; धूप और अव्यवस्था पर उठे सवाल

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देवरिया। देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम का संदेश देने के लिए निकाली गई तिरंगा यात्रा उस समय चिंता का विषय बन गई, जब यात्रा में शामिल करीब 80 छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। कई छात्राएं बेहोश होकर गिर पड़ीं, जबकि दर्जनों को उल्टी, चक्कर और कमजोरी की शिकायत होने लगी। एक साथ बड़ी संख्या में छात्राओं के बीमार होने की सूचना मिलते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।

अस्पताल में एक साथ पहुंचीं छात्राएं, कम पड़ गए बेड

बीमार छात्राओं को आनन-फानन में महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के पहुंचने से अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। हालात ऐसे हो गए कि ट्रॉमा सेंटर में उपलब्ध बेड कम पड़ गए। कुछ छात्राओं का इलाज जमीन पर लिटाकर करना पड़ा, जबकि कई बेडों पर दो-दो छात्राओं को भर्ती किया गया।

अस्पताल प्रशासन ने तत्काल अतिरिक्त चिकित्सा व्यवस्था की और छह से अधिक डॉक्टरों की टीम को उपचार एवं निगरानी में लगाया गया।

सुबह नौ बजे से धूप में थीं छात्राएं

जानकारी के अनुसार भाजपा की ओर से आयोजित तिरंगा यात्रा गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे पीएमश्री राजकीय इंटर कॉलेज से शुरू हुई थी। हालांकि कस्तूरबा बालिका विद्यालय की छात्राओं को सुबह करीब नौ बजे ही कार्यक्रम स्थल पर बुला लिया गया था। भीषण गर्मी और उमस के बीच छात्राएं लंबे समय तक खुले मैदान और सड़क पर रहीं।

यात्रा में जिले के करीब 20 विद्यालयों के लगभग 2,500 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। डेढ़ किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान छात्र-छात्राएं हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय और देशभक्ति के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।

यात्रा पूरी होते ही बिगड़ने लगी हालत

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यात्रा समाप्त होने के बाद जब छात्राएं दोपहर करीब 1:30 बजे विद्यालय लौटीं तो कई छात्राएं अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। कुछ को चक्कर आने लगे तो कई को लगातार उल्टियां होने लगीं। देखते ही देखते दर्जनों छात्राओं की हालत खराब हो गई, जिसके बाद शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाया।

डॉक्टरों ने बताया डिहाइड्रेशन का मामला

मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के अनुसार प्रारंभिक जांच में छात्राओं में सीवियर डिहाइड्रेशन (गंभीर निर्जलीकरण) के लक्षण पाए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई छात्राओं ने सुबह से पर्याप्त भोजन और पानी नहीं लिया था। इसके बाद तेज धूप और गर्मी में लंबे समय तक रहने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई।

मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. एस.के. मिश्रा ने बताया कि सभी छात्राओं को ओआरएस, सलाइन और आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और फिलहाल सभी छात्राएं खतरे से बाहर हैं।

21 छात्राओं को मिली छुट्टी, बाकी निगरानी में

इलाज के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर 21 छात्राओं को अस्पताल से घर भेज दिया गया, जबकि शेष छात्राओं को निगरानी में रखा गया। अस्पताल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सभी छात्राओं की स्वास्थ्य जांच जारी रखी है।

अस्पताल पहुंचे एसपी, लिया हालचाल

घटना की सूचना मिलते ही देवरिया के पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन से छात्राओं की स्थिति की जानकारी ली तथा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी अस्पताल में मौजूद रहे और पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी।

व्यवस्थाओं पर उठने लगे सवाल

एक साथ 80 छात्राओं के बीमार पड़ने की घटना के बाद कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब भीषण गर्मी और उमस का मौसम था तो छात्राओं के लिए पर्याप्त पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। वहीं अस्पताल में बेड कम पड़ने की तस्वीरें भी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी और उमस के मौसम में किसी भी रैली, यात्रा या सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने से पहले पर्याप्त भोजन और पानी लेना जरूरी है। लंबे समय तक धूप में रहने पर नियमित अंतराल पर पानी पीना चाहिए तथा बच्चों और किशोरों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

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