30-40 साल पुराने जमीन पट्टों की होगी जांच, पट्टाधारकों को मिलेगा वैध प्रमाण पत्र

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तहसील स्तर पर आयोजित होने वाले सम्पूर्ण समाधान दिवस में जमीन के पट्टों से जुड़ी शिकायतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल करने का निर्णय लिया है। अब जिले में 30 से 40 वर्ष पुराने जमीन के पट्टों की भी जांच कराकर उनका सत्यापन किया जाएगा। जांच में पट्टा वैध पाए जाने पर संबंधित पट्टाधारक को वैध प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाएगा।

जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि समाधान दिवस में जमीन के पट्टों को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त होती हैं। कई मामले वर्षों पुराने होने के कारण अभिलेखों और वास्तविक स्थिति को लेकर विवाद सामने आते हैं। ऐसे मामलों के स्थायी समाधान के लिए पुराने पट्टों की जांच और सत्यापन कराने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि पट्टा चाहे 30 वर्ष पुराना हो या 40 वर्ष पुराना, उसके संबंध में उपलब्ध अभिलेखों, कब्जे और अन्य संबंधित तथ्यों की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो पट्टे नियमानुसार सही पाए जाएंगे, उनके पट्टाधारकों को वैध प्रमाण पत्र दिए जाने की व्यवस्था की जाएगी।

जिलाधिकारी के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य पुराने पट्टों से जुड़े विवादों को कम करना और पात्र पट्टाधारकों के अधिकारों को अभिलेखीय रूप से मजबूती देना है। इससे भविष्य में जमीन के स्वामित्व अथवा पट्टे को लेकर होने वाले विवादों के निस्तारण में भी सहायता मिलेगी।

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