कारीगरइमामहुसैन अब अपने बच्चों के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। रावणकापुतला बनाने के लिए सबसे पहले फर्चियों से ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद उस पर अलग-अलग रंगों की पन्नियां लगाकर आकर्षक रूप दिया जाता है। परिवार द्वारा तैयार किए गए रावणकेपुतलेउत्तरप्रदेश के कई शहरों में भी लगाए जाते हैं।
इमामहुसैन का कहना है कि सभी लोगों को एक-दूसरे के त्योहारों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और मिल-जुलकर त्योहार मनाने चाहिए।त्योहारसमाजमेंप्रेम,सद्भावऔरभाईचारे का संदेश देते हैं।
तीन पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपराधार्मिकसद्भावऔरआपसीविश्वास की खूबसूरत मिसाल पेश करती है। यह परिवार अपने हुनर के जरिए समाज को एकता और भाईचारे का संदेश दे रहा है।








