तिनपरसा नहर किनारे पेड़ों की लगातार कटाई, वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

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खड्डा। कुशीनगर जनपद के खड्डा वन क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटान का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। खड्डा वन विभाग क्षेत्र के अंतर्गत तिनपरसा नहर के किनारे बीती रात अज्ञात चोरों ने तीन पेड़ों को काटकर लकड़ी पार कर दी। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, तिनपरसा नहर के किनारे पेड़ों की कटान का यह कोई पहला मामला नहीं है। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले करीब दो महीनों में नहर के आसपास से लगभग 10 पेड़ों को अज्ञात चोर काटकर ले जा चुके हैं। लगातार हो रही कटान के बावजूद जिम्मेदार विभाग द्वारा प्रभावी निगरानी और कार्रवाई नहीं किए जाने से वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि नहर के किनारे सुनसान इलाकों का फायदा उठाकर रात के समय पेड़ों को काटा जा रहा है। पेड़ काटने के बाद चोर लकड़ी को मौके से हटा ले जाते हैं, जिससे कई बार घटना की जानकारी विभाग तक समय से नहीं पहुंच पाती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि नियमित रूप से गश्त और निगरानी की जाए तो इस तरह पेड़ों की कटान पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

वहीं, लगातार पेड़ों की कटान से क्षेत्र का हरित आवरण भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग से नहर के किनारे नियमित गश्त बढ़ाने, संवेदनशील स्थानों को चिन्हित करने और रात के समय विशेष निगरानी करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में और पेड़ कटने की आशंका बनी रहेगी।

मामले को लेकर जब खड्डा रेंजर अमित तिवारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके संज्ञान में यह पहला मामला आया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

रेंजर ने स्पष्ट किया कि पेड़ काटने में जो भी व्यक्ति शामिल पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों की पहचान होने पर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब देखने वाली बात यह होगी कि वन विभाग की जांच में पेड़ों की कटान के पीछे कौन लोग हैं और पिछले दो महीनों में हुई कथित कटान को लेकर विभाग क्या कार्रवाई करता है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद तिनपरसा नहर क्षेत्र में वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।

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