कुशीनगर जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार धार्मिक उत्सव के साथ-साथ पुलिस के इतिहास से जुड़ी एक पुरानी परंपरा के पुनर्जीवन की भी गवाह बनी। वर्ष 1994 में जन्माष्टमी की रात हुए पचरुखिया कांड के बाद थानों में जन्माष्टमी मनाने की परंपरा करीब 31 वर्षों तक बंद रही।
वर्ष 2025 में तत्कालीन पुलिस कप्तान संतोष मिश्रा ने पचरुखिया कांड में शहीद पुलिसकर्मियों की स्मृति में इस परंपरा को दोबारा शुरू कराया। वर्ष 2026 में वर्तमान पुलिस कप्तान केशव कुमार के कार्यकाल में लगातार दूसरी बार जिले के सभी थानों में जन्माष्टमी का आयोजन किया गया।
30 अगस्त 1994 को जन्माष्टमी की रात पचरुखिया घाट पर पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। घटना का असर पुलिस महकमे पर इतना गहरा पड़ा कि इसके बाद थानों में जन्माष्टमी का आयोजन बंद हो गया।
समय बीतता गया, लेकिन पचरुखिया के शहीद पुलिसकर्मियों की स्मृति पुलिस महकमे में बनी रही। वर्ष 2025 में तत्कालीन कप्तान संतोष मिश्रा ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए थानों में फिर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने की शुरुआत कराई।
वर्ष 2026 में कप्तान केशव कुमार के कार्यकाल में जिले के सभी थानों में लगातार दूसरी बार जन्माष्टमी मनाई गई। हाटा कोतवाली में आकर्षक झांकियां सजाई गईं और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ थाना परिसर जयकारों से गूंज उठे।
इस तरह पचरुखिया कांड की शहादत से जुड़ी खामोशी के 31 वर्षबाद थानों में फिर कान्हा का जन्मोत्सव मनाया गया। यह आयोजन शहीद पुलिसकर्मियों की स्मृति और पुलिस परंपरा को समर्पित रहा।









