महाराजगंज सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर जहदा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से सामने आई है। जहाँ ग्रामीणों को समय पर इलाज मिलना चाहिए, वहाँ खुद स्वास्थ्य केंद्र ही ‘बीमार’ नजर आ रहा है। अस्पताल में न तो डॉक्टर अपनी कुर्सी पर मौजूद हैं और न ही दवा वितरण कक्ष में कोई कर्मचारी।
जब AR7 न्यूज़ की टीम जमीनी हकीकत जानने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जहदा पहुँची, तो नजारा चौंकाने वाला था। अस्पताल में मरीज इलाज की उम्मीद में भटकते दिखे, लेकिन डॉक्टर की कुर्सी पूरी तरह खाली पड़ी थी। दवा वितरण काउंटर भी खाली थी क्योंकि वहाँ का स्टाफ भी नदारद था।

हद तो तब हो गई जब AR7 न्यूज़ के रिपोर्टर ने खुद मरीज बनकर गायब डॉक्टर से फोन पर संपर्क किया। डॉक्टर साहब का जवाब स्वास्थ्य विभाग की गैर-जिम्मेदाराना रवैये को साफ बयां करता है। उन्होंने बेहद लापरवाही भरे लहजे में कहा, “आज हॉस्पिटल पर नहीं हूँ, जब रहूँगा तब आइएगा।”बीमारी समय देखकर नहीं आती, तो क्या मरीज अपना इलाज कराने के लिए डॉक्टर साहब की सहूलियत का इंतजार करेंगे?
जो स्वास्थ्य केंद्र खुद अव्यवस्थाओं की बीमारी से जूझ रहा है, वहाँ आम जनता के स्वास्थ्य का इलाज कौन करेगा?प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की इस खुली लापरवाही से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। दूर-दराज से आए गरीब मरीज बिना दवा और बिना जांच के वापस लौटने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग इस नदारद डॉक्टर और बेपरवाह स्टाफ पर क्या सख्त कदम उठाते हैं, या फिर जहदा की जनता यूँ ही राम भरोसे छोड़ी जाएगी।









