पोषाहार वितरण और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर उठे सवाल, कार्यकर्ताओं से कथित धन मांगने की शिकायत की भी चर्चा
महराजगंज। जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन और उनकी निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। सोहगीबरवा क्षेत्र को लेकर दावा किया गया है कि 18 महीने की अवधि में सुपरवाइजर द्वारा केवल चार बार केंद्रों का निरीक्षण किया गया।
यदि यह दावा सही है तो आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों और अन्य पात्र लाभार्थियों को पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, ऐसे में नियमित निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कार्यकर्ताओं से पैसे मांगने का भी आरोप
स्थानीय स्तर पर कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से हर महीने पैसे मांगने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष भी इस मामले में सामने आना बाकी है।
ऐसे में शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है। यदि जांच में अनधिकृत धन की मांग के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का सवाल भी महत्वपूर्ण होगा।
पोषाहार वितरण और रिकॉर्ड की जांच जरूरी
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति, पोषाहार वितरण, स्टॉक और संबंधित अभिलेखों की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित निरीक्षण होने से योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक सुविधाओं की पहुंच की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
विभाग से मांगी जा रही जानकारी
मामले में यह जानकारी भी महत्वपूर्ण है कि पिछले 18 महीनों में सोहगीबरवा क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों का कितनी बार निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्या-क्या कमियां सामने आईं, कितनी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार हुईं और अनियमितता मिलने पर क्या कार्रवाई की गई—इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
स्थानीय स्तर पर विभाग से निरीक्षण रिपोर्ट, पोषाहार वितरण से संबंधित रिकॉर्ड और शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।
फिलहाल कार्यकर्ताओं से धन मांगने और कम निरीक्षण किए जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में विभागीय अधिकारियों का पक्ष और उपलब्ध रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।









