गांव के नाम पर पंजीकरण, दूसरे स्थान से संचालन का मामला; सत्यापन के बाद ही दोबारा सक्रिय होंगी आईडी
कुशीनगर। जिले में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के संचालन को लेकर प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्राउंड लेवल पर केंद्रों की वास्तविक स्थिति और पोर्टल पर दर्ज विवरण में अंतर मिलने के बाद जिले के 300 से अधिक सीएससी की आईडी अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दी गई हैं। कार्रवाई के बाद सीएससी संचालकों में खलबली मची है। संबंधित संचालकों को अब अपने केंद्र की वास्तविक लोकेशन और संचालन से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा।
जिले में करीब 2200 जनसेवा केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोग विभिन्न सरकारी योजनाओं, प्रमाणपत्रों, ऑनलाइन आवेदन, बैंकिंग सहित कई डिजिटल सेवाओं का लाभ लेते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में आईडी के अस्थायी रूप से बंद होने से उन केंद्रों के संचालन पर असर पड़ने की स्थिति बन गई है।
पंजीकरण कहीं, संचालन कहीं और मिला
सीएससी जिला प्रबंधक गौरव पाण्डेय के अनुसार, जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें सीएससी की आईडी जिस स्थान के लिए पंजीकृत थी, वहां उसका संचालन नहीं हो रहा था। कुछ मामलों में गांव के पते और लोकेशन पर सीएससी का पंजीकरण कराया गया, लेकिन सेवाओं का संचालन शहर अथवा किसी अन्य स्थान से किया जा रहा था।
प्रबंधन के स्तर पर ऐसे मामलों को सीएससी नेटवर्क की पारदर्शिता और सुरक्षा के लिहाज से गंभीरता से लिया गया है। इसी क्रम में करीब 300 से अधिक आईडी को फिलहाल अस्थायी रूप से ब्लॉक किया गया है।
फ्रॉड गतिविधियों पर रोक के लिए सख्ती
सीएससी नेटवर्क के जरिए बड़ी संख्या में नागरिकों के सरकारी दस्तावेज, आवेदन और डिजिटल लेनदेन से जुड़ी सेवाएं संचालित होती हैं। ऐसे में किसी आईडी का निर्धारित स्थान के बजाय दूसरे स्थान से संचालन होने पर उसकी निगरानी और वास्तविक संचालक की पहचान को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों और प्रबंधन स्तर पर लिए गए निर्णय के तहत संबंधित आईडी की जांच शुरू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य अनियमित संचालन और संभावित फर्जी गतिविधियों पर अंकुश लगाना तथा सीएससी नेटवर्क को अधिक पारदर्शी बनाना है।
सत्यापन के बाद ही खुलेगा रास्ता
अस्थायी रूप से ब्लॉक की गई आईडी को स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय नहीं लिया गया है। संबंधित वीएलई (विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर) के केंद्र का ग्राउंड लेवल सत्यापन कराया जाएगा। जांच में केंद्र निर्धारित स्थान पर संचालित मिलता है और जरूरी मानक पूरे पाए जाते हैं तो नियमानुसार आईडी दोबारा सक्रिय की जा सकती है।
इसके लिए संचालकों को अपने केंद्र पर निर्धारित सीएससी ब्रांडिंग, आवश्यक दस्तावेज और केंद्र की वर्तमान स्थिति की फोटो उपलब्ध करानी होगी। सत्यापन में केंद्र की लोकेशन और पोर्टल पर दर्ज जानकारी का मिलान भी किया जाएगा।
2200 केंद्रों के नेटवर्क पर निगरानी बढ़ी
जिले में बड़ी संख्या में सीएससी संचालित होने के कारण इनके जरिए सरकारी और डिजिटल सेवाएं आम लोगों तक पहुंचती हैं। ऐसे में 300 से अधिक आईडी पर हुई कार्रवाई को सिर्फ संचालकों के खिलाफ कदम के रूप में नहीं, बल्कि पूरे सीएससी नेटवर्क की जमीनी स्थिति की जांच और डेटा सत्यापन की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्यापन के बाद कितने केंद्र निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं और कितनी आईडी दोबारा सक्रिय होती हैं।









