महाराजगंजl सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की खोखली दावों की पोल एक बार फिर महराजगंज के जिला महिला अस्पताल में खुल गई है। मरीज दर्द से कराहते रहे, लेकिन अस्पताल से डॉक्टर नदारद मिले। बुधवार दोपहर 12 बजे जब ए आर 7न्यूज की टीम ने धरातली स्थिति का जायजा लिया, तो नजारा चौंकाने वाला थाl—अस्पताल के ओपीडी से लेकर इमरजंसी तक, हर डॉक्टर के केबिन पर ताले लटके हुए थे। लाचार मरीज और उनके तीमारदार इलाज के इंतजार में तड़पते रहे और आखिरकार मजबूरी में उन्हें महंगे प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी।
डिलीवरी के नाम पर ₹4000 की अवैध वसूली
व्यवस्था की सबसे वीभत्स तस्वीर तब सामने आई जब लक्ष्मीपुर एकढंगा से आई गर्भवती महिला सबीता देवी को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। उसके साथ आई क्षेत्रीय आशा जानकी कार्यकर्ता के अनुसार, डिलीवरी और सामान्य जांच के नाम पर डॉक्टरों और कर्मचारियों ने खुलेआम ₹4000 की घूस मांगने का आरोप है। गरीब परिवार द्वारा रुपये देने में असमर्थता जताने पर मरीज को बिना इलाज के ही टरका दिया गया। इस पूरी घटना और घूसखोरी का पुख्ता वीडियो साक्ष्य (विजुअल) भी सामने आ चुका है, जिसने स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार को पूरी तरह नंगा कर दिया है।
दलालों के रहमोकरम पर सरकारी अस्पताल
में अब मरीजों के इलाज का केंद्र कम और प्राइवेट अस्पतालों के दलालों का अड्डा ज्यादा बन चुका है। रोजाना सैकड़ों ग्रामीण दूर-दराज से इस उम्मीद में आते हैं कि उन्हें मुफ्त और बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन यहां कदम रखते ही दलाल और लापरवाह डॉक्टर उन्हें प्राइवेट क्लीनिकों में खींच लेते हैं। हर दिन ऐसे मामले सामने आने और सोशल मीडिया पर डॉक्टरों की मनमानी के वीडियो वायरल होने के बाद भी प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह मौन है। डॉक्टरों की यह हठधर्मिता और मनमानी अब रोज की कहानी बन चुकी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने साधी चुप्पी
जब इस पूरे घटनाक्रम और डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कोई भी संतोषजनक जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी सीधे तौर पर इस बात की ओर इशारा करती है कि इस पूरे खेल में निचले कर्मचारियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक की मिलीभगत है।
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जनता पूछ रही सवाल: कब जागेगा प्रशासन?
लापरवाही की हद पार कर चुके इस तंत्र से अब आम जनता का भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। पीड़ित मरीजों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि वायरल वीडियो और साक्ष्यों के आधार पर दोषी डॉक्टरों और रिश्वत मांगने वाले कर्मचारियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर उन्हें बर्खास्त किया जाए। यदि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस पर जल्द से जल्द सख्त कदम नहीं उठाता है, तो अस्पताल में तड़पते मरीजों का यह गुस्सा सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।









