दो वर्षों में बनाए गए बिलों के भौतिक सत्यापन की मांग, अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की मांग
कुशीनगर। पडरौना शहर में बिजली बिलिंग व्यवस्था को लेकर एक उपभोक्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए अधीक्षण अभियंता से शिकायत की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बिलिंग का कार्य करने वाली फुल एंड ग्रिड कंपनी से जुड़े कुछ कर्मचारी उपभोक्ताओं के घर जाकर मीटर की वास्तविक रीडिंग लेने के बजाय कथित रूप से घर बैठे या एक ही स्थान से बिजली के बिल तैयार कर रहे हैं। मामले में पिछले दो वर्षों के दौरान बनाए गए बिलों की जांच और भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है।
सुभाष चौक पडरौना निवासी पियूष कुमार ने अधीक्षण अभियंता को शिकायती पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में रिजवान, धर्मेंद्र, अजहरुद्दीन और नाजिया खातून का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि ये लोग पिछले करीब दो वर्षों से उपभोक्ताओं के बिजली बिल तैयार करने का काम कर रहे हैं।
मीटर रीडिंग लिए बिना बिल बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई उपभोक्ताओं के परिसर पर जाकर मीटर की वास्तविक रीडिंग दर्ज करने के बजाय कथित रूप से घर बैठे या एक ही स्थान से बिल तैयार किए जा रहे हैं। इससे वास्तविक बिजली खपत और बिल में अंतर होने की आशंका बनी रहती है तथा उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पियूष कुमार का कहना है कि यदि बिलिंग कर्मचारी मौके पर जाकर मीटर की वास्तविक रीडिंग नहीं लेते हैं तो उपभोक्ताओं के बिल में गड़बड़ी की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने इस संबंध में संबंधित कर्मचारियों के कार्यों की जांच कराने की मांग की है।
अधिक बिल बनाने के दबाव का भी लगाया आरोप
शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभागीय स्तर पर अधिक से अधिक बिजली बिल तैयार करने के दबाव के कारण कथित तौर पर इस तरह की अनियमितता हो रही है। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से यह भी जांच कराने की मांग की है कि बिलिंग कर्मचारियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए उपभोक्ताओं के परिसर पर जाकर रीडिंग ली या नहीं।
शिकायतकर्ता ने अजहरुद्दीन को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अजहरुद्दीन के पास अपनी आईडी होने के साथ ही उनकी पत्नी नाजिया खातून के नाम से भी एक आईडी बनी हुई है। आरोप है कि दोनों आईडी के माध्यम से कथित तौर पर घर बैठे बिजली के बिल तैयार किए जा रहे हैं।
हालांकि शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
दो वर्षों के बिलों की जांच और भौतिक सत्यापन की मांग
पियूष कुमार ने अधीक्षण अभियंता से मांग की है कि शिकायत में जिन कर्मचारियों का उल्लेख किया गया है, उनके द्वारा पिछले करीब दो वर्षों के दौरान बनाए गए बिजली बिलों की विस्तृत जांच कराई जाए। इसके साथ ही चयनित उपभोक्ताओं के मीटर और जारी किए गए बिलों का भौतिक सत्यापन कर यह पता लगाया जाए कि बिल वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर बनाए गए थे या नहीं।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है या कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित कंपनी, नामित कर्मचारियों अथवा बिजली विभाग का पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।









