देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीनों दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने इसे राज्य सरकार की मजबूत कानूनी पैरवी का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना किसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं, बल्कि एक बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई है।
हनी पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने घटना के सामने आने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कराया और निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित की। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने मामले को केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि न्यायालय में मजबूत साक्ष्यों के साथ प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की। उनके मुताबिक करीब 500 पन्नों की चार्जशीट में लगभग 100 गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल किए गए।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मजबूत जांच और अभियोजन के बाद न्यायालय ने तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अब उनकी जमानत याचिकाएं फिर खारिज होना दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भी उन्हें कानूनी राहत नहीं मिल सकी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अंकिता के परिवार की मांगों का भी सम्मान किया। परिजनों की मांग पर सरकारी अधिवक्ता बदले गए और माता-पिता की मांग पर सीबीआई जांच के आदेश भी दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता के साथ अंकिता के पिता और भाई को रोजगार उपलब्ध कराया गया।
हनी पाठक ने कहा कि न्याय व्यवस्था साक्ष्यों और कानून के आधार पर चलती है, राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं। उन्होंने कहा कि त्वरित गिरफ्तारी, एसआईटी जांच, चार्जशीट, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और प्रभावी अभियोजन सरकार की कार्रवाई का हिस्सा रहे हैं।
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