दशकों की तल्खी के बीच भारत-पाकिस्तान के रिश्तों की डोर किसके हाथ?

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14 अगस्त, पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस और 15 अगस्त, भारत का स्वतंत्रता दिवस—दो लगातार दिनों में दोनों देश अपनी-अपनी आजादी का जश्न मनाते हैं। लेकिन आजादी के 79 वर्षों बाद भी भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तनाव, अविश्वास और सुरक्षा चिंताओं से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए हैं।

भारत 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। इसके एक दिन पहले 14 अगस्त को पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। भारत में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में याद किया जाता है। 1947 का विभाजन दोनों देशों के इतिहास की ऐसी घटना है, जिसकी छाप आज भी भारत-पाकिस्तान के रिश्तों और समाज की सामूहिक स्मृति में दिखाई देती है।

कश्मीर से आतंकवाद तक, रिश्तों में बनी रही तल्खी

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कश्मीर का मुद्दा लंबे समय से सबसे प्रमुख विवादों में रहा है। इसके अलावा सीमा पार आतंकवाद, नियंत्रण रेखा पर तनाव, सैन्य टकराव और परमाणु हथियारों की मौजूदगी ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

भारत लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान की जमीन से सक्रिय या पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन भारत में हमलों को अंजाम देते रहे हैं। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। इसी विवाद के चलते आतंकवाद दोनों देशों के बीच बातचीत और संबंध सुधार की राह में बड़ी बाधा बना हुआ है।

सीमा पर तनाव ने बढ़ाई सुरक्षा चिंता

भारत-पाकिस्तान सीमा और नियंत्रण रेखा पर समय-समय पर होने वाली घटनाएं दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ाती रही हैं। दोनों देशों के पास परमाणु हथियार होने के कारण किसी बड़े सैन्य टकराव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बनी रहती है।

भारत के लिए पाकिस्तान केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दा भी है। वहीं पाकिस्तान की सुरक्षा और विदेश नीति में भी भारत को लंबे समय से प्रमुख चुनौती के रूप में देखा जाता रहा है।

आम लोगों की सोच में भी दिखता है असर

दशकों से चले आ रहे विवादों का असर केवल सरकारों और सेनाओं के स्तर पर नहीं, बल्कि दोनों देशों के आम नागरिकों की सोच पर भी दिखाई देता है। अमेरिकी संस्था Pew Research Center के 2024 के एक सर्वे के अनुसार, भारत में पाकिस्तान के प्रति नकारात्मक राय रखने वालों की संख्या सकारात्मक राय रखने वालों से काफी अधिक थी।

यह आंकड़ा बताता है कि राजनीतिक और सैन्य तनाव का असर दोनों देशों की जनता की एक-दूसरे के प्रति धारणा पर भी पड़ा है। हालांकि लोगों के बीच सांस्कृतिक, भाषाई और पारिवारिक जुड़ाव की कई पुरानी कड़ियां आज भी मौजूद हैं।

रिश्तों की डोर किसके हाथ?

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों का भविष्य केवल सीमा पर होने वाली घटनाओं से तय नहीं होगा। आतंकवाद, कश्मीर और सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों के समाधान के साथ-साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति, आपसी संवाद और विश्वास बहाली भी जरूरी होगी।

दोनों देशों के इतिहास में युद्ध और तनाव के कई अध्याय हैं, लेकिन शांति और संवाद के प्रयास भी हुए हैं। ऐसे में सवाल यही है कि आने वाले वर्षों में भारत-पाकिस्तान के रिश्तों की डोर टकराव और अविश्वास के हाथों में रहेगी या संवाद और शांति की दिशा में आगे बढ़ेगी।

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