कुशीनगर में बिना फिटनेस दौड़ रही 174 स्कूली वाहन, जांच में जुटी विभाग

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कुशीनगर। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने अब बिना फिटनेस और वैध परमिट के संचालित स्कूली वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मिशन सेफ फ्यूचर-2 के तहत आज से विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। अभियान के दौरान बिना वैध फिटनेस सड़क पर दौड़ते मिले स्कूली वाहनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिले में पहले 203 विद्यालयी वाहनों का फिटनेस लंबित था। 11 अगस्त तक कुछ वाहन संचालकों ने अपने वाहनों का फिटनेस करा लिया, लेकिन अभी भी 174 गाड़ियों का फिटनेस बाकी है। परिवहन विभाग ने इन वाहनों की सूची पुलिस को भी उपलब्ध करा दी है। संबंधित थाना क्षेत्रों में पुलिस के सहयोग से ऐसे वाहनों की पहचान और जांच की जाएगी। विभाग का कहना है कि स्कूली वाहनों की फिटनेस केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है। इसलिए अब बिना फिटनेस और जरूरी मानकों को पूरा किए सड़क पर चलने वाले वाहनों के खिलाफ किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

पहले कई महीने दिया गया मौका

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) कुशीनगर की ओर से 29 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक को भेजे पत्र में विद्यालयी वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस सहयोग मांगा गया था। पत्र में कहा गया था कि जिले के विभिन्न विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के परिवहन के लिए बस, वैन समेत अन्य वाहनों का संचालन किया जा रहा है। बच्चों की सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग की ओर से विद्यालय प्रबंधनों को वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र सहित सभी जरूरी दस्तावेज अद्यतन रखने के लिए लगातार निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद कई विद्यालयी वाहनों की फिटनेस और परमिट का नवीनीकरण नहीं कराया गया। विभाग के मुताबिक विद्यालय प्रबंधनों को फिटनेस कराने के लिए पर्याप्त समय दिया गया और कई बार नोटिस भी जारी किए गए। इसके बाद भी जब बड़ी संख्या में वाहनों की फिटनेस लंबित रही तो विभाग ने अब कार्रवाई का निर्णय लिया है।

203 से घटकर 174 पर पहुंची संख्या

मीडिया से बातचीत करते हुए एआरटीओ डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि विभाग ने विद्यालयों को पहले ही कई महीने का समय दिया था कि वे अपने वाहनों की फिटनेस करा लें। इसके बावजूद जिले में अभी भी काफी संख्या में स्कूली वाहनों की फिटनेस बाकी है। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग ने पुलिस से सहयोग के लिए 203 वाहनों की सूची भेजी थी, जिनका फिटनेस लंबित था। 11 अगस्त तक कुछ वाहन संचालकों ने अपने वाहनों की फिटनेस करा ली। इसके बाद अब 174 वाहन ऐसे हैं, जिनकी फिटनेस अभी भी बाकी है। एआरटीओ ने स्पष्ट किया कि अब वाहन संचालकों को और समय देकर कार्रवाई को टालने के बजाय सड़क पर वाहनों की जांच की जाएगी।

मिशन सेफ फ्यूचर-2 में होगी सख्ती

मिशन सेफ फ्यूचर-2 के तहत आज से शुरू हो रहे अभियान में परिवहन विभाग और पुलिस की टीमें विद्यालयी वाहनों की जांच करेंगी। अभियान के दौरान बिना वैध फिटनेस सड़क पर चलता मिला कोई भी स्कूली वाहन कार्रवाई की जद में आएगा।
एआरटीओ डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने कहा कि यदि बिना फिटनेस वाले वाहन सड़क पर चलते हुए पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत के अनुसार चालान और वाहन सीज करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाई भी की जा सकती है।परिवहन विभाग ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस को वाहनों की सूची उपलब्ध कराई है। इससे संबंधित थाना क्षेत्रों में भी ऐसे वाहनों की पहचान आसान होगी और कार्रवाई को गति मिलेगी।

सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस का सहयोग अहम

परिवहन विभाग की ओर से पुलिस को भेजे गए पत्र में सीमावर्ती थाना क्षेत्रों में कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस के सहयोग की आवश्यकता भी बताई गई है। विभागीय संसाधन सीमित होने के कारण ऐसे क्षेत्रों में विद्यालयी वाहनों की जांच और कार्रवाई में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।पुलिस से संबंधित थानों के माध्यम से बिना वैध फिटनेस और परमिट संचालित विद्यालयी वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी हुई थी चर्चा

28 जुलाई को जिलाधिकारी/अध्यक्ष, सड़क सुरक्षा समिति की अध्यक्षता में हुई बैठक में विद्यालयी वाहनों के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए गए थे। बैठक में फिटनेस और परमिट समाप्त वाहनों की सूची तैयार करने और उनके खिलाफ प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद परिवहन विभाग ने विद्यालयवार और थानावार वाहनों की सूची तैयार कर पुलिस अधीक्षक को उपलब्ध कराई। अब मिशन सेफ फ्यूचर-2 के तहत इस सूची के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।

बच्चों की सुरक्षा सबसे अहम

परिवहन विभाग का कहना है कि विद्यालयी वाहनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे सफर करते हैं। ऐसे में वाहनों की तकनीकी स्थिति सही होना बेहद जरूरी है। फिटनेस प्रमाणपत्र के माध्यम से वाहन की सड़क पर संचालन योग्य स्थिति सुनिश्चित की जाती है।विभाग का उद्देश्य केवल वाहनों का चालान करना नहीं, बल्कि विद्यालयी वाहनों को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित कराना है, ताकि बच्चों के आवागमन को सुरक्षित बनाया जा सके।

अभिभावकों से भी सतर्क रहने की अपील

एआरटीओ डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों को स्कूल भेजने से पहले वाहन की फिटनेस जरूर पता करें। जिस बस, वैन या अन्य वाहन से उनका बच्चा विद्यालय जा रहा है, उसकी फिटनेस वैध है या नहीं, इसकी जानकारी रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों को भी जागरूक होना होगा। यदि कोई विद्यालयी वाहन बिना फिटनेस या असुरक्षित स्थिति में संचालित हो रहा है तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी जा सकती है।

साजिद अंसारी पड़रौना कुशीनगर

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