एक साल में बंद हुए 9900 सरकारी स्कूल! UDISE+ के आंकड़ों ने खोली पोल, जानें किन राज्यों का हाल सबसे बुरा

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एक तरफ जहां देशभर में सरकारी नौकरी की चाहत लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों की हालत साल दर साल बिगड़ती जा रही है। हाल ही में सामने आए UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) के नए आंकड़ों ने इस चिंताजनक तस्वीर को उजागर किया है। संसद में पेश किए गए इन आंकड़ों के मुताबिक बीते एक साल में देशभर में लगभग 9900 सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर ताला लग चुका है।

आखिर क्या कहते हैं आंकड़े?

लोकसभा में साझा की गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 में देश में सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की कुल संख्या 8.89 लाख से भी ज्यादा थी। लेकिन वर्ष 2025-26 आते-आते यह आंकड़ा घटकर 8.80 लाख पर सिमट गया। यानी सीधे तौर पर देखा जाए तो पिछले महज एक साल के भीतर करीब 9900 सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर?

आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे बड़ी गिरावट पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में दर्ज हुई है, जहां सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की संख्या में दो हजार से भी ज्यादा की कमी आई है। इस सूची में मेघालय के बाद तेलंगाना और आंध्र प्रदेश का नंबर आता है, जहां भी हजारों की तादाद में स्कूल बंद किए गए हैं।

कुछ राज्यों में हुआ इजाफा भी

हालांकि यह तस्वीर हर जगह एक जैसी नहीं है। जहां अधिकतर राज्यों में स्कूलों की संख्या घटी है, वहीं कुछ राज्यों में इसमें बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। बिहार में सरकारी स्कूलों की संख्या में इजाफा देखा गया है, तो वहीं छत्तीसगढ़ में भी स्कूलों की तादाद में हल्की बढ़त दर्ज हुई है।

छात्रों की संख्या घटना है असली वजह?

इन तमाम आंकड़ों के बीच सबसे अहम सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी तादाद में स्कूल बंद क्यों हो रहे हैं। संसद में यह मुद्दा भी उठाया गया कि क्या छात्रों की घटती संख्या ही इन स्कूलों के बंद होने की मुख्य वजह है। हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया कि कुल बंद हुए स्कूलों में से कितने वास्तव में छात्र संख्या में कमी की वजह से बंद हुए और कितने अन्य कारणों से।

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