कंटेंट क्रिएटर समय रैना इन दिनों एक बार फिर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं, मगर इस बार कारण कोई नया विवाद नहीं बल्कि एक नेक पहल है। असम में बाढ़ की विभीषिका झेल रहे लोगों की मदद के लिए समय ने राज्य के मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹10 लाख रुपये की सहायता राशि भेजी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी देते हुए समय के योगदान को सराहा और कहा कि ऐसे मुश्किल समय में जनसहयोग बेहद मायने रखता है।
लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प मोड़ भी देखने को मिला है। समय रैना के फैंस बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री से गुजारिश कर रहे हैं कि उनके खिलाफ दर्ज पुराना केस भी अब वापस ले लिया जाए।
नेटिज़न्स की प्रतिक्रियाएं और अपील
जैसे ही यह खबर सामने आई कि समय रैना ने बाढ़ राहत के लिए इतनी बड़ी रकम दान की है, सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के कमेंट्स की झड़ी लग गई। कई यूजर्स ने भावुक होकर CM से पुरानी बातें भुलाकर एफआईआर हटाने की मांग रखी, तो कुछ ने हल्के-फुल्के अंदाज में जिंदगी के अनुभवों पर टिप्पणी की। साथ ही कुछ यूजर्स ने यह भी बताया कि बीते दिनों सरकार ने समय के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी।
CM हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी पोस्ट में समय का शुक्रिया अदा करते हुए इस दान को असम के लिए बेहद अहम बताया।
पहले क्यों हुआ था समय पर केस दर्ज?
गौरतलब है कि समय रैना पर दर्ज एफआईआर की जड़ें 2025 के एक चर्चित विवाद से जुड़ी हुई हैं। यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया समय के मशहूर शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में एक एपिसोड के दौरान गेस्ट जज बनकर पहुंचे थे, जहां उन्होंने एक कंटेस्टेंट से उसके माता-पिता की सेक्स लाइफ से जुड़ा बेहद आपत्तिजनक सवाल पूछ लिया था।
यह मामला इतना बढ़ गया कि राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक शिकायत पहुंची। इसके बाद असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के आदेश पर गुवाहाटी पुलिस ने 10 फरवरी 2025 को समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया समेत कई अन्य कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
असम में बाढ़ का कहर जारी
समय रैना का यह दान ऐसे नाजुक वक्त पर आया है जब असम राज्य भारी बाढ़ से जूझ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 13 जिलों में लगभग 1.55 लाख लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं, और अब तक इस मानसून सीजन में 98 लोगों की जान जा चुकी है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि ऐसे योगदान सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं देते, बल्कि प्रभावित समुदायों को दोबारा खड़ा करने में जन-भागीदारी की भावना को भी मजबूत करते हैं।









